नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने मंगलवार को अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पूर्व सरकार का बचाव किया. उन्होंने कहा कि कैग (CAG) की रिपोर्ट ने पुरानी आबकारी नीति में खामियों को उजागर किया है, जिन्हें आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पहले ही पहचान चुकी थी और नई नीति लाकर उन्हें दूर कर चुकी थी.
दिल्ली की नवगठित भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में, ने आज आठवीं दिल्ली विधानसभा के दूसरे दिन कैग की रिपोर्ट पेश की.
हरियाणा और यूपी से अवैध रूप से लाई जाती थी शराब
मंगलवार को एक प्रेस वार्ता में आतिशी ने कहा, “दिल्ली विधानसभा में आज आबकारी ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत की गई. इसके सात अध्याय 2017-21 की आबकारी नीति पर आधारित हैं, जबकि एक अध्याय नई आबकारी नीति से संबंधित है. दिल्ली सरकार ने पहले ही जनता के सामने पुरानी आबकारी नीति में भ्रष्टाचार और खामियों को उजागर किया था.”
उन्होंने आगे कहा कि पुरानी नीति के तहत हरियाणा और उत्तर प्रदेश से अवैध रूप से शराब लाई जाती थी. “यह रिपोर्ट वही बात दोहरा रही है जो हमने पहले ही कही थी कि पुरानी नीति के कारण दिल्ली के लोगों को नुकसान हो रहा था. यह स्पष्ट करता है कि AAP सरकार ने पुरानी नीति को हटाकर सही निर्णय लिया,” उन्होंने जोड़ा.
आबकारी नीति में 28% से अधिक भ्रष्टाचार
पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने आगे कहा कि यह रिपोर्ट हमारे इस दावे की पुष्टि करती है कि शराब की बिक्री में भ्रष्टाचार हो रहा था. “रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ठेकेदारों द्वारा 28% से अधिक भ्रष्टाचार किया जा रहा था, और यह धन दलालों की जेब में जा रहा था. रिपोर्ट यह भी दिखाती है कि शराब की ब्लैक मार्केटिंग हो रही थी और सभी को पता था कि किस पार्टी के लोग शराब ठेकों से जुड़े थे. ठेकेदारों ने लागत मूल्य को गलत तरीके से गणना कर मुनाफा कमाया,” उन्होंने कहा.
नई नीति पारदर्शी, लेकिन लागू नहीं होने से हुआ नुकसान
उन्होंने यह भी कहा कि रिपोर्ट के आठवें अध्याय में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि नई नीति पारदर्शी थी, इसमें ब्लैक मार्केटिंग रोकने के उपाय थे और इससे राजस्व में वृद्धि होनी चाहिए थी.
“जब यही नीति पंजाब में लागू की गई, तो वहां आबकारी राजस्व में बढ़ोतरी हुई. इस नीति के कारण 2021 से 2025 के बीच राजस्व में 65% की वृद्धि हुई. रिपोर्ट कहती है कि यदि नई नीति को ठीक से लागू किया जाता, तो एक वर्ष में ही राजस्व 4,108 करोड़ रुपये से बढ़कर 8,911 करोड़ रुपये हो जाता. लेकिन इस नीति को लागू नहीं किया गया, जिससे 2,000 करोड़ रुपये का कम राजस्व प्राप्त हुआ. इसकी जांच होनी चाहिए कि इसे लागू करने से किसने रोका. इसके लिए तीन लोग जिम्मेदार हैं: दिल्ली के उपराज्यपाल (LG), CBI और ED. यह रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि AAP सरकार ने पुरानी नीति को हटाकर सही निर्णय लिया. हम मांग करते हैं कि इस कैग रिपोर्ट के आधार पर दिल्ली के उपराज्यपाल, CBI और ED द्वारा जांच की जाए, एफआईआर दर्ज की जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए,” आतिशी ने कहा.