पाकिस्तान का आतंक से पुराना नाता, बिलावल भुट्टो की स्वीकारोक्ति: ‘यह कोई राज नहीं

नई दिल्ली: पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी ने स्वीकार किया है कि उनके देश का आतंकवादी संगठनों के साथ पुराना इतिहास रहा है. स्काई न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि यह कोई राज है कि पाकिस्तान का अतीत आतंकवाद से जुड़ा रहा है.” यह बयान पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की हालिया टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि पाकिस्तान ने तीन दशकों तक आतंकवादी संगठनों को समर्थन और धन मुहैया कराया.

बिलावल ने कहा, “हमने अपने अतीत के कारण बहुत कुछ सहा है. पाकिस्तान ने बार-बार चरमपंथ की लहरें झेली हैं. लेकिन इन कठिनाइयों से हमने सबक लिया और आतंकवाद से निपटने के लिए आंतरिक सुधार किए.” उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान अब इस तरह की गतिविधियों में शामिल नहीं है और यह उसका “दुर्भाग्यपूर्ण इतिहास” है. हालांकि, उनके इस बयान को कई लोग खोखला मान रहे हैं, खासकर भारत के साथ बढ़ते तनाव और हाल के पाहलगाम आतंकी हमले के बाद.

पाहलगाम हमले ने बढ़ाया तनाव

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पाहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें ज्यादातर पर्यटक थे. इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े रिफॉर्मेशन फ्रंट ने ली थी. भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराते हुए 1960 के सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया. बिलावल ने इस संधि के निलंबन पर आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा था, “सिंधु हमारा है. या तो इसमें हमारा पानी बहेगा, या उनका खून.”

रक्षा मंत्री की स्वीकारोक्ति

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्काई न्यूज के साथ साक्षात्कार में कहा था, “हम पिछले तीन दशकों से अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए यह गंदा काम करते रहे हैं. यह हमारी गलती थी, और इसके लिए हमें भुगतना पड़ा.” उन्होंने यह भी कहा कि अगर पाकिस्तान ने सोवियत संघ के खिलाफ युद्ध और 9/11 के बाद की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया होता, तो उसका रिकॉर्ड बेदाग होता.

भारत की प्रतिक्रिया

भारत ने बिलावल के बयानों को “भड़काऊ बयानबाजी” करार दिया है. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, “पाकिस्तान को समझना होगा कि वे भारतीयों की हत्या कर बिना सजा के नहीं बच सकते. अगर खून बहेगा, तो वह उनके पक्ष में हमसे ज्यादा बहेगा.” केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बिलावल को “मूर्ख” कहते हुए चेतावनी दी कि पाकिस्तान को पाहलगाम हमले की भारी कीमत चुकानी होगी.

बिलावल का दोहरा चेहरा?

बिलावल ने मीरपुर खास में एक रैली में कहा, “पाकिस्तान एक शांतिप्रिय देश है, और इस्लाम एक शांतिप्रिय धर्म है. हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अगर कोई हमारी सिंधु पर हमला करेगा, तो उन्हें युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए.” उनके इस बयान को भारत ने खोखली बयानबाजी करार दिया है, क्योंकि पाकिस्तान का आतंकवाद को समर्थन देने का इतिहास लंबा रहा है.

यह स्वीकारोक्ति ऐसे समय में आई है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच राजनयिक संबंध निचले स्तर पर हैं. भारत ने अटारी में एकीकृत चेक पोस्ट को बंद कर दिया है और आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. बिलावल का यह बयान न केवल पाकिस्तान की नीतियों पर सवाल उठाता है, बल्कि क्षेत्रीय शांति के लिए भी चुनौती पेश करता है.

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