नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2026 से कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित करने की सिफारिश की है. बोर्ड ने इस संबंध में एक मसौदा नीति जारी की है, जिसे आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक सुझावों के लिए उपलब्ध कराया गया है.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत लिया गया निर्णय
सीबीएसई ने अपने आधिकारिक नोटिस में कहा, “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत यह अनुशंसा की गई है कि छात्रों को बोर्ड परीक्षा में अपने प्रदर्शन में सुधार करने का अवसर दिया जाए.”
शिक्षा मंत्रालय में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में आयोजित एक बैठक में यह चर्चा हुई कि 2025-26 से कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाएं दो बार कराई जाएं. इसके आधार पर सीबीएसई ने एक मसौदा नीति तैयार की है और इस पर सभी हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए हैं.
बोर्ड ने अपनी वेबसाइट (cbse.gov.in) पर यह मसौदा प्रकाशित किया है, ताकि स्कूल, शिक्षक, अभिभावक, छात्र और अन्य संबंधित लोग 9 मार्च 2025 तक इस पर अपने सुझाव दे सकें. इन प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद अंतिम नीति तैयार की जाएगी.
फैसला अभी प्रारंभिक चरण में: सीबीएसई
सीबीएसई के सचिव हिमांशु गुप्ता ने News18 से कहा कि यह सिर्फ एक मसौदा है और इसे अंतिम रूप देने से पहले सभी हितधारकों के सुझावों को ध्यान में रखा जाएगा.
बोर्ड परीक्षा के ‘हाई स्टेक्स’ प्रभाव को कम करने की कोशिश
बोर्ड ने कहा है कि छात्रों पर परीक्षा का अत्यधिक दबाव कम करने के लिए उन्हें एक शैक्षणिक वर्ष में दो बार परीक्षा देने की अनुमति होगी—एक मुख्य परीक्षा और एक सुधार परीक्षा.
सीबीएसई कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा 2025-26 का संभावित कार्यक्रम
सीबीएसई द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, 2026 में पहली बोर्ड परीक्षा 17 फरवरी से 6 मार्च तक आयोजित होगी, जबकि दूसरी परीक्षा 5 मई से 20 मई के बीच कराई जाएगी.
परीक्षा में असफल छात्रों को मिलेगा सुधार का मौका
सीबीएसई ने स्पष्ट किया कि यदि कोई छात्र पहली परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं होता है, तो उसे कक्षा 11 में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी. हालांकि, दूसरी परीक्षा के परिणाम के आधार पर उसका प्रवेश तय होगा.
बोर्ड ने कहा, “दूसरी परीक्षा के बाद मेरिट सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा. सभी पांच विषयों में उत्तीर्ण होने वाले छात्रों को पास घोषित किया जाएगा. जो छात्र पहली परीक्षा में एक से पांच विषयों में अनुत्तीर्ण होंगे, उन्हें ‘सुधार श्रेणी’ में रखा जाएगा और उन्हें जुलाई 2026 में होने वाली दूसरी परीक्षा में बैठने का अवसर मिलेगा.”
इस नई व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों पर परीक्षा का बोझ कम करना और उन्हें अपने प्रदर्शन को सुधारने का एक और मौका देना है. हालांकि, इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय हितधारकों से मिली प्रतिक्रियाओं के बाद ही लिया जाएगा.