नई दिल्ली: भारत ने अपनी स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 27 मई 2025 को एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) कार्यक्रम के कार्यान्वयन मॉडल को मंजूरी दी, जो भारत का पहला पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान होगा. यह परियोजना रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के तहत वैमानिकी विकास एजेंसी (एडीए) द्वारा संचालित है, जिसमें निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के साथ साझेदारी शामिल है. ₹15,000 करोड़ की शुरुआती लागत से पांच प्रोटोटाइप विकसित किए जाएंगे, जिनका पहला प्रोटोटाइप 2028 तक तैयार होने और 2035 तक भारतीय वायु सेना और नौसेना में शामिल होने की उम्मीद है.
एएमसीए एक 25 टन वजनी, दो इंजन वाला, हर मौसम में कार्य करने वाला बहुउद्देशीय विमान है, जो हवाई श्रेष्ठता, जमीनी हमले, शत्रु वायु रक्षा दमन और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसे मिशनों के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसकी प्रमुख विशेषताओं में स्टील्थ एयरफ्रेम, आंतरिक हथियार डिब्बा (1,500 किग्रा क्षमता), बाहरी पेलोड (5,500 किग्रा), और 6,500 किग्रा आंतरिक ईंधन शामिल हैं. यह विमान सुपरक्रूज़ क्षमता, उन्नत सेंसर एकीकरण, अत्याधुनिक एवियोनिक्स और विशेष वायु प्रवाह प्रणाली (डायवर्टरलेस सुपरसोनिक इनटेक) से लैस होगा, जो इसे रडार से बचने में सक्षम बनाएगा. शुरुआती दो स्क्वाड्रनों में अमेरिकी जीई एफ414 इंजन का उपयोग होगा, जबकि बाद में स्वदेशी 110 किलो न्यूटन इंजन विकसित किया जाएगा.
इस परियोजना को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) ने मार्च 2024 में मंजूरी दी थी, और अब कार्यान्वयन मॉडल के तहत भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से भाग लेने का अवसर मिलेगा. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, लेकिन निजी क्षेत्र की भागीदारी से समयसीमा को तेज करने और स्वदेशी एयरोस्पेस उद्योग को बढ़ावा देने की उम्मीद है. डीआरडीओ के अध्यक्ष समीर वी. कामत ने कहा, “हम 2035 तक इस प्लेटफॉर्म को वायु सेना में शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.”
एएमसीए का विकास क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों, विशेष रूप से चीन के जे-20 स्टील्थ विमान और पाकिस्तान द्वारा जे-35ए विमानों की संभावित खरीद के मद्देनजर महत्वपूर्ण है. यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत पहल का हिस्सा है, जो स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देगी और लाखों नौकरियां पैदा करेगी. रक्षा मंत्रालय का मानना है कि भारतीय वायु सेना के 200 से अधिक एएमसीए विमानों के ऑर्डर से देश के रक्षा उद्योग को लाखों करोड़ रुपये का कारोबार मिलेगा. यह विमान न केवल भारत की हवाई शक्ति को बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य के लड़ाकू विमानों के विकास में भी योगदान देगा.