ईरान ने स्वीकार किया है कि अमेरिकी हवाई हमलों से उसके प्रमुख परमाणु ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है, और उसने वाशिंगटन से मुआवजे की मांग की है, अन्यथा वह संयुक्त राष्ट्र में शिकायत दर्ज करेगा.
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बुधवार को अल जजीरा से कहा, “हमारे परमाणु ठिकाने निश्चित रूप से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं.” यह बयान उस दावे के कुछ दिन बाद आया है, जिसमें ईरान ने कहा था कि 21 जून को हुए अमेरिकी हमलों से कोई रेडियोधर्मी प्रदूषण नहीं हुआ. उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने लेबनानी समाचार एजेंसी को बताया कि वाशिंगटन को नुकसान की भरपाई करनी होगी, वरना तेहरान संयुक्त राष्ट्र में कानूनी कार्रवाई करेगा. रिपब्लिक वर्ल्ड के अनुसार, खतीबजादेह ने कहा, “अमेरिका को हमारे ठिकानों को हुए नुकसान का मुआवजा देना होगा.”
हमले, जिन्हें ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ नाम दिया गया, में सात बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स ने फोर्डो, नतांज और इस्फहान में परमाणु सुविधाओं पर 14 जीबीयू-57 बंकर-बस्टर बम गिराए. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, इन हमलों ने फोर्डो में यूरेनियम संवर्धन सुविधा और इस्फहान में 18 संरचनाओं को नष्ट या क्षतिग्रस्त किया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम “पूरी तरह नष्ट” हो गया, लेकिन अमेरिकी खुफिया मूल्यांकन के अनुसार, हमलों ने ईरान की परमाणु क्षमता को केवल कुछ महीनों के लिए पीछे धकेला. सीएनएन ने बताया कि फोर्डो और नतांज में सेंट्रीफ्यूज और संवर्धित यूरेनियम का भंडार बड़े पैमाने पर बरकरार है.
ईरान ने हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी. विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्तांबुल में कहा, “अमेरिका ने कूटनीति को नष्ट कर दिया.” रॉयटर्स के अनुसार, ईरान ने कतर के जरिए अमेरिका से संपर्क के बाद सीजफायर स्वीकार किया, लेकिन उसने इजरायल के साथ किसी बाध्यकारी समझौते से इनकार किया. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा कि फोर्डो में “प्रत्यक्ष गतिज प्रभाव” हुआ, और सेंट्रीफ्यूज को “गंभीर नुकसान” होने की आशंका है. सीएनएन के हवाले से, ग्रॉसी ने निरीक्षकों को ठिकानों पर भेजने की तत्काल जरूरत जताई.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हमलों को “खतरनाक वृद्धि” करार देते हुए कूटनीति की वकालत की. यूएन न्यूज के अनुसार, उन्होंने चेतावनी दी कि क्षेत्र “प्रतिशोध के चक्रव्यूह” में फंस सकता है. इस बीच, ईरान की संसद ने संयुक्त राष्ट्र परमाणु निगरानी संगठन के साथ सहयोग निलंबित करने का मतदान किया, लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त नहीं किया. बघाई ने कहा, “हम एनपीटी के तहत अपने अधिकारों का सम्मान चाहते हैं.” एबीपी लाइव के अनुसार, ईरान ने इजरायल पर युद्ध अपराधों का आरोप लगाया और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा का दावा किया.
यह विवाद मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा सकता है. ईरान की मुआवजा मांग और संयुक्त राष्ट्र में शिकायत की धमकी से वैश्विक कूटनीति की नई चुनौतियां सामने आ सकती हैं. जैसे-जैसे स्थिति विकसित हो रही है, दुनिया की नजरें ईरान की अगली कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के जवाब पर टिकी हैं.