पटना: राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है और उन्हें परिवार से भी अलग कर लिया है. यह कदम तेज प्रताप के फेसबुक पर एक विवादास्पद पोस्ट के बाद उठाया गया, जिसमें उन्होंने अनुष्का यादव नामक महिला के साथ 12 साल पुराने प्रेम संबंध का दावा किया था. हालांकि, तेज प्रताप ने बाद में इस पोस्ट को हटाकर दावा किया कि उनका सोशल मीडिया अकाउंट हैक हो गया था और तस्वीरों को गलत तरीके से संपादित किया गया.
लालू प्रसाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि निजी जीवन में नैतिक मूल्यों की अनदेखी सामाजिक न्याय के लिए पार्टी के सामूहिक संघर्ष को कमजोर करती है. उन्होंने लिखा, “मेरे बड़े बेटे का व्यवहार, सार्वजनिक आचरण और गैर-जिम्मेदाराना रवैया हमारे पारिवारिक मूल्यों और परंपराओं के अनुरूप नहीं है. इसलिए, मैं उन्हें पार्टी और परिवार से तत्काल प्रभाव से अलग करता हूं. अब से उनकी पार्टी या परिवार में कोई भूमिका नहीं होगी.” उन्होंने यह भी कहा कि तेज प्रताप अपने निजी जीवन के फैसले स्वयं लेने में सक्षम हैं और जो लोग उनके साथ संबंध रखना चाहें, वे अपना निर्णय स्वतंत्र रूप से लें.
इस घटना ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है, खासकर तब जब राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं. तेज प्रताप का विवादास्पद पोस्ट, जिसमें उन्होंने अनुष्का यादव के साथ लंबे समय से रिश्ते की बात कही थी, ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कीं. कई यूजर्स ने उनकी 2018 में ऐश्वर्या राय के साथ हुई शादी का जिक्र किया, जो कुछ ही महीनों में टूट गई थी. ऐश्वर्या, जो बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा राय की पोती हैं, ने तेज प्रताप और उनके परिवार पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था. इस मामले में तलाक की कानूनी लड़ाई अभी भी जारी है. ऐश्वर्या के पिता और पूर्व मंत्री चंद्रिका राय ने अपनी बेटी के समर्थन में आरजेडी छोड़ दी थी और इस मामले को राजनीतिक व कानूनी रूप से लड़ने की बात कही थी.
लालू के छोटे बेटे और आरजेडी के प्रमुख चेहरा तेजस्वी यादव ने इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा, “हम इस तरह के व्यवहार को बर्दाश्त नहीं कर सकते. हम बिहार के लोगों के लिए समर्पित हैं और उनकी समस्याओं को उठाने का काम कर रहे हैं. निजी और राजनीतिक जीवन अलग-अलग हैं. मेरा बड़ा भाई अपने निजी फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है.” वहीं, लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने भी अपने पिता के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि जो लोग पारिवारिक मर्यादा और मूल्यों का सम्मान करते हैं, उनकी आलोचना नहीं होती. उन्होंने लिखा, “हमारा परिवार हमारा गर्व है, और हमारे पिता हमारे लिए भगवान समान हैं. हम यह स्वीकार नहीं कर सकते कि कोई भी इनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाए.”
विपक्षी दल जनता दल (यूनाइटेड) ने लालू के इस कदम को चुनावी नौटंकी करार दिया. जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा, “लालू जी जनता को गुमराह कर रहे हैं. जब ऐश्वर्या के साथ अन्याय हुआ, तब उनकी अंतरात्मा क्यों नहीं जागी? यह केवल चुनावी नाटक है, और चुनाव के बाद तेज प्रताप को फिर से पार्टी में शामिल कर लिया जाएगा.”
यह पहली बार नहीं है जब तेज प्रताप अपने बयानों या व्यवहार के कारण चर्चा में आए हों. इससे पहले, मई 2024 में, एक वायरल वीडियो में उन्हें एक पार्टी कार्यकर्ता को मंच से धक्का देते देखा गया था, जिसके बाद उन्होंने सफाई दी थी कि यह उनकी मंशा नहीं थी. तेज प्रताप ने 2020 के विधानसभा चुनाव में समस्तीपुर के हसनपुर सीट से चुनाव लड़ा था और इस बार वह वैशाली जिले की महुआ सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में थे.
लालू के इस फैसले को राजनीतिक विश्लेषक आरजेडी के भीतर नुकसान नियंत्रण की कोशिश के रूप में देख रहे हैं, ताकि तेजस्वी यादव की छवि और पार्टी की चुनावी संभावनाओं पर असर न पड़े. जैसे-जैसे बिहार में चुनावी माहौल गर्म हो रहा है, यह पारिवारिक और राजनीतिक ड्रामा राज्य की सियासत में नया मोड़ ला सकता है.