‘सभी सौदे रद्द करो, वे युद्ध में हैं’: ट्रंप का भारत-पाक संघर्ष पर दावा, भारत ने खारिज की मध्यस्थता की बात

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच कथित तौर पर परमाणु युद्ध को रोकने के लिए दोनों देशों को व्यापार सौदे रद्द करने की धमकी दी, लेकिन भारत ने ट्रंप की मध्यस्थता की बात को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि संघर्ष विराम द्विपक्षीय सैन्य वार्ता का नतीजा था.

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा कि उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि यदि भारत और पाकिस्तान युद्ध बंद नहीं करते तो उनके साथ सभी व्यापारिक संबंध खत्म कर दिए जाएंगे. उन्होंने दावा किया, “मैंने कोषाध्यक्ष स्कॉट बेसेन्ट और वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक से कहा था कि भारत और पाकिस्तान के साथ सभी व्यापार सौदे रद्द कर दें.” ट्रंप ने इसे 10 मई को भारत-पाक सीमा पर चार दिनों तक ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद समाप्त हुए संघर्ष से जोड़ा.

भारत ने ट्रंप के दावों को लगातार खारिज किया है. हाल ही में ट्रंप के साथ 35 मिनट की फोन बातचीत में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत “कभी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करेगा” और संघर्ष विराम दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच सीधी बातचीत का परिणाम था. भारत ने जोर दिया कि यह पूरी तरह से द्विपक्षीय प्रक्रिया थी.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से ट्रंप की भूमिका की पुष्टि की और उनकी मदद के लिए आभार व्यक्त किया. हालांकि, भारत ने ट्रंप के दावों को गलत बताया, और भारतीय मीडिया ने इसे अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की कोशिश करार दिया. कुछ एक्स पोस्ट में इस बात पर चर्चा हुई कि ट्रंप ने कम से कम 15 बार यह दावा दोहराया है, जबकि भारत ने हर बार इसका खंडन किया.

ट्रंप ने भारत-पाक तनाव को सर्बिया-कोसोवो जैसे अन्य वैश्विक संघर्षों के साथ जोड़ा, जहां उन्होंने समान व्यापारिक धमकियों का इस्तेमाल करने का दावा किया. उन्होंने कहा, “सर्बिया, कोसोवो युद्ध करने वाले थे. मैंने कहा, अगर तुम ऐसा करोगे, तो अमेरिका के साथ कोई व्यापार नहीं होगा. भारत और पाकिस्तान के साथ भी यही हुआ.” भारत का दृढ़ रुख और ट्रंप के दावों ने क्षेत्रीय स्वायत्तता और वैश्विक कूटनीति में तीसरे पक्ष की भूमिका पर बहस छेड़ दी है.

भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में द्विपक्षीय बातचीत की अहमियत को रेखांकित करते हुए, भारत ने किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को साफ तौर पर नकार दिया है. ट्रंप के दावे वैश्विक मंच पर चर्चा का विषय बने हुए हैं, लेकिन भारत की स्थिति स्पष्ट है कि क्षेत्रीय शांति के लिए उसकी अपनी प्रक्रियाएं पर्याप्त हैं. इस बीच, जांचकर्ता और विश्लेषक इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या ट्रंप की धमकियों का कोई वास्तविक प्रभाव पड़ा या यह केवल कूटनीतिक बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का मामला है.

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