ट्रम्प प्रशासन का दावा: भारत-पाक युद्धविराम में टैरिफ की भूमिका, भारत ने नकारा

नई दिल्ली: ट्रम्प प्रशासन ने 23 मई 2025 को अमेरिकी अदालत में दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच 10 मई को हुए युद्धविराम में उनकी टैरिफ धमकी ने अहम भूमिका निभाई. भारत ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि यह युद्धविराम दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत का नतीजा था. यह युद्धविराम भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद आया, जो 7 मई को शुरू हुआ और 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे.

ट्रम्प प्रशासन ने दावा किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने टैरिफ के दबाव से दोनों देशों को पूर्ण युद्ध से रोका. अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने कहा कि ट्रम्प ने भारत और पाकिस्तान को व्यापारिक रियायतों की पेशकश की, जिसने नौ आतंकी ठिकानों और तीन सीमा-पार हमलों के बाद तनाव को कम किया. हालांकि, 28 मई को अमेरिकी अदालत ने ट्रम्प के 2 अप्रैल के “लिबरेशन डे” टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया, जिसे एक सप्ताह बाद निलंबित कर दिया गया था.

भारत ने अमेरिकी मध्यस्थता के दावों को सिरे से खारिज किया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 29 मई को स्पष्ट किया कि 7 से 10 मई तक अमेरिकी नेताओं के साथ बातचीत केवल सैन्य स्थिति पर केंद्रित थी, जिसमें टैरिफ या व्यापार का कोई जिक्र नहीं हुआ. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि युद्धविराम दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच 10 मई को दोपहर 3:35 बजे तय हुआ था.

ट्रम्प प्रशासन ने यह भी दावा किया कि टैरिफ दबाव ने चीन को 90 दिन के व्यापारिक युद्धविराम के लिए मजबूर किया. लेकिन जयशंकर ने जोर देकर कहा कि भारत की सैन्य कार्रवाई ने पाकिस्तान को युद्धविराम की मांग करने पर मजबूर किया. एक्स पर कई यूजर्स ने ट्रम्प के दावों पर सवाल उठाए. यूजर @mr_mayank ने लिखा, “वे स्पष्ट रूप से पीएम मोदी को कमजोर कर रहे हैं, क्या मोदी अब जवाब देंगे?” कांग्रेस ने ट्रम्प के बयानों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक की मांग की, और जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि क्या भारत ने तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार किया है.

अमेरिकी अदालत कुछ हफ्तों में अंतिम फैसला सुनाएगी, जबकि छोटे व्यवसाय टैरिफ के आर्थिक प्रभावों पर बहस कर रहे हैं. भारत ने स्पष्ट किया कि वह पाकिस्तान के साथ सीधे बातचीत को प्राथमिकता देता है. यह घटना व्यापार, कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा के बीच जटिल संबंधों को उजागर करती है.

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