ममता बनर्जी का ‘मृत्यु कुंभ’ बयान: भाजपा ने लगाया सनातन धर्म का अपमान करने का आरोप

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नई दिल्ली| पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ को लेकर दिए गए एक दावे को गलत बताया. उन्होंने कहा कि महाकुंभ 144 साल बाद नहीं बल्कि हर 12 साल में आयोजित होता है.

बनर्जी की यह टिप्पणी तब आई जब उन्होंने उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार पर महाकुंभ मेले के कुप्रबंधन का आरोप लगाया था और इसे ‘मृत्यु कुंभ’ करार दिया था. इस बयान के बाद उन्हें तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा.

ममता बनर्जी का दावा

पश्चिम बंगाल विधानसभा में बजट सत्र के दौरान बनर्जी ने कहा, “महाकुंभ हर 12 साल में होता है. यह 2014 में भी हुआ था. जो लोग इसे 144 साल बाद होने वाला आयोजन बता रहे हैं, वे गलत हैं.”

उन्होंने आगे कहा कि उनके बयान का मकसद तीर्थयात्रियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था, बल्कि प्रशासनिक अव्यवस्थाओं को उजागर करना था. बनर्जी ने कहा, “मैं श्रद्धालुओं के खिलाफ कुछ नहीं कह रही, मैं व्यवस्था और तैयारियों की बात कर रही हूं. अगर सही योजना नहीं होगी तो लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी.”

भाजपा का पलटवार

भाजपा ने ममता बनर्जी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी. पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने कहा, “उनकी संदेहपूर्ण सोच उनकी हिंदू विरोधी मानसिकता को दर्शाती है. उनके बयान राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं और सनातन धर्म के पवित्र आयोजनों को नीचा दिखाने की कोशिश है.”

भाजपा ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह बयान ‘हिंदू विरोधी मानसिकता’ को उजागर करता है और उनके तुष्टीकरण की राजनीति को दर्शाता है. पार्टी ने संतों और साधुओं से पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने की अपील की.

महाकुंभ में भगदड़ और ममता बनर्जी की नाराजगी

29 जनवरी को प्रयागराज के संगम क्षेत्र में मौनी अमावस्या के पावन स्नान के दौरान भगदड़ मच गई थी, जिसमें कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई और 60 से अधिक लोग घायल हो गए. इस घटना को लेकर ममता बनर्जी ने योगी सरकार पर निशाना साधा और कहा, “महाकुंभ ‘मृत्यु कुंभ’ में बदल गया है. मैं महाकुंभ का सम्मान करती हूं, गंगा मां का भी सम्मान करती हूं, लेकिन यहां कोई तैयारी नहीं थी. कितने लोगों को बचाया गया?”

धार्मिक नेताओं की नाराजगी

ममता बनर्जी की टिप्पणी पर कई धार्मिक नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अरुण गिरी ने कहा कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल को ‘सनातन धर्म विरोधी राज्य’ बना रही हैं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को पहले अपने राज्य की स्थिति सुधारनी चाहिए, न कि उत्तर प्रदेश की आलोचना करनी चाहिए.

निर्मोही अणी अखाड़ा के अध्यक्ष महंत राजेंद्र दास ने भी उनके बयान की निंदा की और इसे सनातन धर्म पर ‘हमला’ बताया. उन्होंने मांग की कि ममता बनर्जी को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए.

वीआईपी संस्कृति पर भी उठाए सवाल

ममता बनर्जी ने महाकुंभ मेले में वीआईपी संस्कृति को लेकर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने आरोप लगाया कि खास लोगों को विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं, जबकि आम श्रद्धालु बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने कभी भी गंगा सागर मेले में वीआईपी संस्कृति को बढ़ावा नहीं दिया.

इस पूरे विवाद के बीच, महाकुंभ में हुई भगदड़ और व्यवस्थाओं पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं. विपक्ष और धार्मिक संगठनों ने ममता बनर्जी के बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जबकि मुख्यमंत्री का कहना है कि उनकी आलोचना श्रद्धालुओं के खिलाफ नहीं बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर केंद्रित थी.

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