आसिम मुनीर ने चीनी सैन्य अभ्यास की तस्वीर को भारत पर हमले के रूप में पेश किया, पाक पीएम को भेंट की

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इस्लामाबाद: पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने एक विवादास्पद कदम उठाते हुए 2019 के चीनी सैन्य अभ्यास की तस्वीर को भारत के खिलाफ कथित सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन बुनयान-उल-मरसूस’ के रूप में प्रस्तुत किया और इसे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भेंट किया. यह घटना शनिवार को इस्लामाबाद में आयोजित एक उच्चस्तरीय रात्रिभोज के दौरान हुई, जिसमें राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, विदेश मंत्री इशाक डार और सीनेट चेयरमैन यूसुफ रजा गिलानी सहित पाकिस्तान के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व शामिल थे.

मुनीर ने इस तस्वीर को ‘मार्का-ए-हक – ऑपरेशन बुनयान-उल-मरसूस’ के दौरान पाकिस्तानी सेना की कथित सफलता और नेतृत्व की दूरदर्शिता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया. हालांकि, सोशल मीडिया पर तस्वीर के सार्वजनिक होने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि यह तस्वीर वास्तव में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के PHL-03 रॉकेट लॉन्चर की है, जिसे 2019 में एक अभ्यास के दौरान लिया गया था. इस खुलासे के बाद पाकिस्तान की साख पर सवाल उठे और सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना शुरू हो गई.

सोशल मीडिया मंच X पर उपयोगकर्ताओं ने इस घटना को ‘फोटोशॉप’ और ‘कैनवा’ के जरिए जीत का दावा करने की कोशिश करार दिया. एक उपयोगकर्ता ने लिखा, “पाकिस्तान का नवीनतम कारनामा: शहबाज शरीफ ने आसिम मुनीर को 2019 के चीनी अभ्यास की तस्वीर भेंट की, इसे भारत के खिलाफ ऑपरेशन बताते हुए.” भारतीय उपयोगकर्ताओं ने इसे ‘राष्ट्रीय शर्मिंदगी’ करार देते हुए कहा कि पाकिस्तान अपनी सैन्य उपलब्धियों के लिए मूल तस्वीरें तक पेश नहीं कर सका.

यह घटना भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जवाब में हुई, जिसे 7 मई 2025 को शुरू किया गया था. यह ऑपरेशन 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे. भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए, जिससे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे समूहों को भारी नुकसान हुआ. पाकिस्तान ने इसके जवाब में 8 से 10 मई तक ड्रोन और मिसाइल हमले किए, लेकिन भारतीय सेना ने इनका मुंहतोड़ जवाब दिया और 10 मई को दोनों देशों ने युद्धविराम पर सहमति जताई.

पाकिस्तान के इस दावे को भारत ने खारिज करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों, जैसे नूर खान और भोलारी हवाई अड्डों, को निशाना बनाया, जिसमें छह पाकिस्तानी वायुसेना कर्मियों की मौत हुई, न कि नागरिकों की, जैसा कि पाकिस्तान ने दावा किया था. इस घटना ने पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं, क्योंकि यह स्पष्ट है कि कथित ‘जीत’ का जश्न मनाने के लिए विदेशी तस्वीर का सहारा लिया गया.

पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से इस विवाद पर अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है. यह घटना भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच एक और विवादास्पद अध्याय जोड़ती है, जिसमें दोनों देश एक-दूसरे पर आतंकवाद और आक्रामकता का आरोप लगाते रहे हैं.

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