नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दिल्ली में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के एक जवान को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है. आरोपी, जिसकी पहचान मोती राम जाट के रूप में हुई है, पर 2023 से पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा करने का आरोप है. एनआईए के अनुसार, जाट को 21 मई 2025 को हिरासत में लिया गया और उसे पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष अदालत ने 6 जून तक एनआईए की हिरासत में भेज दिया है.
जांच में खुलासा हुआ है कि जाट ने विभिन्न माध्यमों से पाकिस्तानी अधिकारियों से धन प्राप्त किया और इसके बदले में संवेदनशील जानकारी साझा की. एनआईए के एक प्रवक्ता ने बताया कि आरोपी की गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा थीं, जिसके चलते उसकी निगरानी शुरू की गई थी. सीआरपीएफ ने जाट को 21 मई से सेवा से बर्खास्त कर दिया है, यह कहते हुए कि उसने स्थापित नियमों और प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया.
यह गिरफ्तारी 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद बढ़ी हुई निगरानी का हिस्सा है, जिसमें 26 लोग मारे गए थे. इस हमले के जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया. एनआईए ने इस घटना के बाद जासूसी नेटवर्क पर नकेल कसने के लिए व्यापक अभियान चलाया, जिसके तहत पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
जांच से पता चला है कि जाट अकेले नहीं थे; उत्तरी भारत में पाकिस्तान से जुड़ा एक जासूसी नेटवर्क सक्रिय है. गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों में हरियाणा की एक यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा और पंजाब की गुजाला शामिल हैं, जो कथित तौर पर पाकिस्तान उच्चायोग में तैनात अधिकारी एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश के संपर्क में थीं. एनआईए अब इस नेटवर्क की गहराई और इससे हुए नुकसान का आकलन करने के लिए जाट से पूछताछ कर रही है.
अधिकारियों ने बताया कि जाट की गतिविधियां नियमित खुफिया निगरानी के दौरान सामने आईं, जिसके बाद उनकी सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं सुरक्षा बलों के भीतर आंतरिक खतरों की गंभीरता को दर्शाती हैं. एनआईए ने कहा कि वह अन्य संभावित सहयोगियों की पहचान करने और साझा की गई जानकारी की सीमा का पता लगाने के लिए जांच को विस्तार दे रही है.
इस घटना ने भारत-पाकिस्तान तनाव को और बढ़ा दिया है, खासकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद, जिसने दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक तनाव को तेज कर दिया. पाकिस्तान ने भारतीय कार्रवाइयों की निंदा की है, जबकि भारत ने आतंकवाद और जासूसी के खिलाफ अपनी कठोर नीति को दोहराया है.
