बस्तर के कांकेर में आश्रम शालाओं में खरीदी पर सदन गर्म

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रायपुर | आदिवासी विकास विभाग कांकेर के द्वारा वित्तीय वर्ष 2020-21 में आश्रम शालाओं में कंप्यूटर, प्रिंटर ,फोटो कॉपी मशीन, प्रोजेक्टर खरीदने के लिए निविदा आमंत्रित किये जाने पर सवाल सदन में सत्ता पक्ष के विधायक सन्तराम नेताम ने आदिम जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम से पूछा। विधायक नेताम ने किन-किन एजेंसियों को सप्लाई करने का आदेश दिया गया है,सामग्री कब प्राप्त हुई और सामग्री का भौतिक सत्यापन किसने किया यह भी पूछा गया।

आदिवासी विकास विभाग कांकेर के द्वारा खरीदी  पर विभागीय मंत्री ने जवाब देते हुए कहा की जेम पोर्टल के माध्यम से अलग-अलग तिथियों में ऑनलाइन निविदा की गई थी। जिसमें अभी तक प्राप्त कम्प्यूटर जिसका जिला स्तरीय समिति के द्वारा भौतिक सत्यापन किया गया लेकिन सामग्री मापदंड के अनुसार नहीं पाए जाने के कारण आपूर्तिकर्ता फर्मों का कार्य आदेश निरस्त किया गया। साथ ही संबंधित फर्मों को ब्लैक लिस्ट करने की कार्यवाही भी प्रक्रिया के अधीन है।

विभागीय विभागीय मंत्री के जवाब से सत्ता पक्ष के विधायक नाखुश होकर विभागीय आयुक्त द्वारा लिखे गए पत्र का हवाला दिया। जिसे लेकर सदन में उपस्थित विपक्षी सदस्यों ने सदस्य संतराम नेताम का साथ देते हुए मंत्री टेकाम कों घेरा।

विपक्ष के अजय चंद्राकर और नेताप्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने मंत्री पर सामग्री खरीदी में घोटाले का आरोप लगाया। मंत्री ने कहा सामग्री का भुगतान हुआ ही नहीं है तो घोटाला होने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि विभागीय आयुक्त के द्वारा समाचार पत्रों के आधार पर पत्र लिखा गया था।

इसके बाद भी सदन में विपक्षी सदस्य और सत्ता पक्ष के संतराम नेताम ने आयुक्त पर कार्यवाही करने दबाव डाला। जिसके बाद मंत्री के बचाव में गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू और संसदीय कार्य मंत्री रविंद्र चौबे ने सदन को जवाब दिया। लेकिन गर्मा गर्मी को बढ़ते देख आखिरकार विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत ने हस्तक्षेप करते हुए मंत्री डॉक्टर प्रेमसाय सिंह टेकाम को कहा कि आयुक्त द्वारा लिखा गया पत्र विवादित हो चुका है। इसलिए मंत्री द्वारा इसकी जांच की जाए या सचिव स्तर पर जांच कराई जाए। आसन्दी के आदेश के बाद सदस्य शांत हुए।

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