पहलगाम का बैसरन वोट बैंक राजनीति के कारण सड़क संपर्क से वंचित

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पहलगाम: जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित बैसरन घाटी, जिसे ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ के नाम से जाना जाता है, अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वविख्यात है, लेकिन यह सड़क संपर्क से वंचित है. हाल के खुलासों से पता चला है कि स्थानीय वोट बैंक राजनीति ने इस क्षेत्र में पक्की सड़क निर्माण के सरकारी प्रयासों को बार-बार बाधित किया है. यह मुद्दा 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद और भी चर्चा में आया, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी. इस हमले ने क्षेत्र की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की कमी को उजागर किया है.

बैसरन घाटी, जो पहलगाम से मात्र 5 किलोमीटर दूर है, तक पहुंचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है. पर्यटक और स्थानीय लोग घोड़े या पैदल यात्रा के जरिए ही इस घाटी तक पहुंचते हैं. घोड़ा वालों का समुदाय, जो इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण वोट बैंक का हिस्सा है, ने सड़क निर्माण के प्रस्तावों का विरोध किया है, क्योंकि इससे उनकी आजीविका पर असर पड़ सकता है. स्थानीय घोड़ा वालों के संगठन के अध्यक्ष अब्दुल वहीद वानी ने कहा, “हम पर्यटकों को घोड़ों पर बैसरन ले जाते हैं. सड़क बनने से हमारी रोजी-रोटी खतरे में पड़ सकती है.” यह समुदाय लंबे समय से स्थानीय नेताओं के साथ मिलकर सड़क निर्माण की योजनाओं को रोकता आया है.

जम्मू-कश्मीर सरकार ने कई बार बैसरन तक सड़क निर्माण की योजना बनाई, लेकिन स्थानीय नेताओं और प्रभावशाली समूहों के दबाव के कारण ये योजनाएं अधूरी रह गईं. एक सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “वोट बैंक की राजनीति ने इस क्षेत्र के विकास को बाधित किया है. घोड़ा वालों का समुदाय एक संगठित मतदाता समूह है, और कोई भी नेता इसे नाराज नहीं करना चाहता.”

22 अप्रैल के आतंकी हमले ने बैसरन की खराब कनेक्टिविटी को और गंभीर बना दिया. हमले के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाने में देरी हुई, क्योंकि वहां कोई मोटर योग्य सड़क नहीं थी. घोड़ा वालों ने घायलों को घोड़ों पर ले जाकर बचाव कार्य में मदद की, लेकिन सड़क की कमी ने राहत कार्यों में बाधा डाली. इस घटना के बाद केंद्र सरकार ने एक सर्वदलीय बैठक में स्वीकार किया कि बैसरन को बिना खुफिया मंजूरी के पर्यटकों के लिए खोला गया था, जिसे एक बड़ी सुरक्षा चूक माना गया.

विशेषज्ञों का कहना है कि वोट बैंक की राजनीति ने न केवल बैसरन के विकास को रोका, बल्कि क्षेत्र की सुरक्षा को भी खतरे में डाला. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच में यह भी सामने आया है कि खराब सड़क संपर्क ने आतंकियों को जंगली क्षेत्रों में छिपने और हमला करने का मौका दिया.

जम्मू-कश्मीर सरकार ने अब बैसरन और अन्य पर्यटन स्थलों की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की योजना बनाई है. हालांकि, स्थानीय समुदायों के हितों और विकास की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना एक चुनौती बना हुआ है. इस घटना ने वोट बैंक राजनीति के दीर्घकालिक प्रभावों पर बहस छेड़ दी है, जो क्षेत्रीय विकास और सुरक्षा को प्रभावित कर रही है.

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