मैसूरु: कर्नाटक सरकार ने मैसूरु को भारत का पहला ‘योग जिला’ बनाने के लिए केंद्रीय आयुष मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा है, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और योग के प्रति गहरी रुचि को दर्शाता है.
2024 में आयुष मंत्रालय की एक जांच टीम ने पाया कि मैसूरु जिले के लगभग 50% परिवार नियमित रूप से योग करते हैं, जो इसे औपचारिक मान्यता के लिए लगभग तैयार करता है. सरकार का लक्ष्य है कि जिले के हर परिवार में योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाए.
मैसूरु में योग और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की मजबूत व्यवस्था है. कर्नाटक के 326 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में से 22 मैसूरु में हैं, जहां प्रशिक्षित योग शिक्षक स्वास्थ्य जागरूकता और रोग निवारण में मदद करते हैं. इसके अलावा, जिले में एक निजी विश्वविद्यालय, कई प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय, पंचकर्मा केंद्र और योग अस्पताल हैं, जो इसे वैकल्पिक चिकित्सा का केंद्र बनाते हैं.
इस योजना की शुरुआत 2017 में हुई थी, लेकिन तब गति नहीं मिली. हाल ही में आयुष टीम के दौरे और देशभर में योग की बढ़ती लोकप्रियता के बाद कर्नाटक सरकार ने इस योजना को फिर से सक्रिय किया है. राज्य सरकार जल्द ही अपनी मंजूरी देगी, जिसके बाद केंद्र से अंतिम स्वीकृति ली जाएगी.
मैसूरु पहले से ही वैश्विक योग साधकों का पसंदीदा गंतव्य है. हर साल करीब 25,000 विदेशी नागरिक यहां योग सीखने आते हैं, खासकर गोकुलम, यदवगिरी और जयलक्ष्मी पुरम जैसे क्षेत्रों में. जिले के 600 प्रमाणित योग स्कूल हर साल 8,000 योग शिक्षकों को प्रशिक्षित करते हैं, जो भारत और विदेशों में योग को बढ़ावा देते हैं.
‘योग जिला’ की मान्यता मिलने पर मैसूरु को अधिक वित्तीय सहायता, विशेष बुनियादी ढांचा और योग से जुड़ी गतिविधियों के लिए सरकारी समर्थन मिलेगा. इससे स्कूलों में योग को बढ़ावा, सार्वजनिक जागरूकता अभियान और स्वास्थ्य प्रणाली में योग का समावेश बढ़ेगा.
मैसूरु का यह कदम न केवल इसे योग आंदोलन का नेतृत्वकर्ता बनाएगा, बल्कि देशभर में योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का एक मॉडल भी प्रस्तुत करेगा. जैसे-जैसे भारत वैश्विक कल्याण आंदोलन में अग्रणी बन रहा है, मैसूरु योग की जीवंत परंपरा और आधुनिक जीवनशैली का प्रतीक बनकर उभर रहा है.
