मॉस्को: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन उस समय बाल-बाल बच गए, जब उनके हेलीकॉप्टर को यूक्रेनी ड्रोन ने रूस के कुर्स्क क्षेत्र में निशाना बनाने की कोशिश की. रूसी मीडिया और अधिकारियों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना 20 मई को पुतिन की कुर्स्क यात्रा के दौरान हुई, जो अप्रैल में यूक्रेनी सेना को क्षेत्र से बाहर करने के बाद उनकी पहली यात्रा थी. रूसी वायु रक्षा बलों ने ड्रोन को समय रहते निष्क्रिय कर दिया, जिससे कोई नुकसान या हताहत नहीं हुआ.
रूसी वायु रक्षा इकाई के कमांडर यूरी दाशकिन ने बताया कि पुतिन के हेलीकॉप्टर के उड़ान मार्ग पर एक यूक्रेनी ड्रोन का पता चला था, जिसे तत्काल नष्ट कर दिया गया. दाशकिन ने रूस 1 चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा, “राष्ट्रपति के हेलीकॉप्टर की उड़ान के दौरान हमले की तीव्रता अचानक बढ़ गई थी. हमारी वायु रक्षा इकाइयों ने एक साथ ड्रोन हमले को रोकने और हेलीकॉप्टर की सुरक्षा सुनिश्चित करने का काम किया.” इस दौरान रूसी बलों ने 46 ड्रोनों को नष्ट करने का दावा किया है. यूक्रेन की ओर से इस हमले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूसी सुरक्षा एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि यूक्रेनी ड्रोन कुर्स्क के हवाई क्षेत्र में कैसे दाखिल हुआ और क्या यह हमला पुतिन की हत्या का प्रयास था या कीव की ओर से मनोवैज्ञानिक रणनीति का हिस्सा. कुर्स्क क्षेत्र अगस्त 2024 में यूक्रेनी सेना के आश्चर्यजनक हमले के बाद से तनाव का केंद्र रहा है, जब यूक्रेनी बलों ने क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया था. रूस ने अप्रैल 2025 में दावा किया था कि उसने कुर्स्क पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया है, हालांकि यूक्रेन ने इस दावे का खंडन किया था.
पुतिन की यह यात्रा रूस की सैन्य ताकत का प्रदर्शन मानी जा रही थी. इस दौरान उन्होंने कुर्स्क-द्वितीय परमाणु ऊर्जा संयंत्र का दौरा किया और स्थानीय अधिकारियों व स्वयंसेवी संगठनों से मुलाकात की. रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, 20 से 23 मई के बीच रूस ने 764 यूक्रेनी ड्रोनों को नष्ट किया, जो इस क्षेत्र में ड्रोन हमलों की बढ़ती तीव्रता को दर्शाता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन युद्ध की बढ़ती भूमिका को उजागर करती है. कुर्स्क, जो यूक्रेन के सूमी क्षेत्र से केवल 30 मील की दूरी पर है, यूक्रेनी ड्रोन हमलों के लिए एक प्रमुख निशाना रहा है. इस घटना ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है, खासकर तब जब हाल के अमेरिकी और यूरोपीय युद्धविराम प्रस्तावों को क्रेमलिन ने खारिज कर दिया है.
