शुभांशु शुक्ला ने रचा इतिहास, 41 साल बाद अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे दूसरे भारतीय

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भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने आज अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पहुंचकर इतिहास रच दिया, वह 1984 में राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय और आईएसएस पर पहुंचने वाले पहले भारतीय बने.

एक्सियॉम-4 मिशन, जो शुक्ला और तीन अन्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर बुधवार को नासा के कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र, फ्लोरिडा से स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट पर ड्रैगन अंतरिक्ष यान के साथ 12:01 बजे (IST) सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ, ने भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा. यह मिशन नासा, इसरो और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के सहयोग से संचालित है.

लखनऊ में 10 अक्टूबर 1985 को जन्मे शुक्ला ने सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, अलीगंज से स्कूली शिक्षा पूरी की. 1999 के कारगिल युद्ध से प्रेरित होकर उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की परीक्षा उत्तीर्ण की और 2005 में कंप्यूटर साइंस में बीएससी की डिग्री हासिल की. 2006 में भारतीय वायुसेना के फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त करने के बाद, उन्होंने सुखोई-30 एमकेआई, मिग-21, मिग-29, जगुआर, हॉक, डोर्नियर और एएन-32 जैसे विमानों पर 2,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव हासिल किया.

2019 में इसरो द्वारा गगनयान मिशन के लिए चुने गए शुक्ला ने रूस के यूरी गगारिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में 2021 में प्रशिक्षण पूरा किया. इसके बाद, बेंगलुरु के एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग फैसिलिटी और नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर में विशेष प्रशिक्षण लिया. हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, वह इस मिशन में सात भारतीय प्रयोग करेंगे, जिनमें माइक्रोग्रैविटी में मूंग और मेथी उगाने जैसे अंतरिक्ष कृषि प्रयोग शामिल हैं.

एक्सियॉम-4 मिशन, जिसकी कमान पूर्व नासा अंतरिक्ष यात्री पेगी व्हिटसन संभाल रही हैं, में पोलैंड के स्लावोश उज़नान्स्की-विस्निव्स्की और हंगरी के तिबोर कपु भी शामिल हैं. यह मिशन भारत, पोलैंड और हंगरी के लिए 40 वर्षों में पहला सरकारी समर्थित मानव अंतरिक्ष मिशन है. 14 दिन की इस यात्रा में चालक दल 31 देशों के 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग करेगा, जिसमें माइक्रोग्रैविटी में पौधों की वृद्धि, मांसपेशी पुनर्जनन और माइक्रोबियल व्यवहार पर अध्ययन शामिल हैं.

शुक्ला ने लॉन्च से पहले बीबीसी को बताया, “मैं उपकरणों के साथ-साथ एक अरब लोगों की उम्मीदें और सपने लेकर जा रहा हूँ.” उनकी बहन शूचि मिश्रा ने कहा, “यह पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है.” इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि यह मिशन गगनयान 2027 के लिए महत्वपूर्ण अनुभव प्रदान करेगा, जो भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन होगा.

यह मिशन भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाता है. शुक्ला की उपलब्धि न केवल गगनयान मिशन के लिए एक मजबूत आधार तैयार करती है, बल्कि युवा पीढ़ी को विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान की ओर प्रेरित करती है. जैसे-जैसे चालक दल 26 जून को आईएसएस के साथ डॉकिंग की तैयारी करता है, भारत इस ऐतिहासिक पल का जश्न मना रहा है.

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