नए सत्र की शुरुवात पर स्कूल नहीं जा सकेंगे छात्र

स्कूलों के बंद होने से स्कूल छोड़ने की दर में 20 प्रतिशत की वृद्धि

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नई दिल्ली | देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच अधिकांश राज्यों में पहली से आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र नए सत्र की शुरूआत में भी स्कूल नहीं जा सकेंगे। घरों में रहकर पढाई करेंगे| इधर  एक अनुमान के अनुसार, स्कूलों के बंद होने से छात्रों के स्कूल छोड़ने की दर (ड्रापआउट रेट) में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को एक राज्य से दूसरे राज्य जाना पड़ा है।

मध्य प्रदेश और छत्तीगढ़ भी कोरोना के हालात बिगड़ते जा रहे हैं। इन प्रदेशों में भी नए सत्र  में स्कूल खुलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि एक बार फिर से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के बीच नए सत्र में छोटी कक्षाओं के लिए फिलहाल स्कूल नहीं खोले जाएंगे। दिल्ली के अलावा पंजाब, पुडुचेरी, गुजरात, हिमाचल, चंडीगढ़, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान समेत कई अन्य राज्यों ने भी फिलहाल छोटी कक्षाओं के लिए स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया है।

इनमें से कई राज्य ऐसे हैं जहां पहले स्कूल खोले गए थे लेकिन अब कोरोना की स्थिति को देखते हुए यहां अलग-अलग समय सीमा तक स्कूल बंद कर दिए गए हैं।

ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं दिल्ली यूनिवर्सिटी एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य अशोक अग्रवाल ने  ने कहा की  कोरोना संक्रमण को देखते हुए ऑनलाइन शिक्षा का विकल्प मजबूरी है। लेकिन जहां संभव हो वहां छात्रों को स्कूल आने का अवसर प्रदान किया जाना चाहिए। एक अनुमान के मुताबिक स्कूल बंद रहने के कारण छात्रों के स्कूल ड्रॉपआउट दर में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यदि अभी भी स्कूल बंद रहे तो छात्रों का ड्रॉपआउट दर और अधिक बढ़ जाएगा।

उन्होंने   कहा, जहां कोरोना के कारण स्कूल खोलना संभव न हो सके वहां ऑनलाइन माध्यमों को और सशक्त किए जाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही स्कूल और छात्रों के बीच अन्य स्तर पर भी संवाद कायम होना चाहिए।

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