छत्तीसगढ़ के बस्तर दो बार पहुंचे थे नाना पाटेकर
छत्तीसगढ़ के बस्तर से दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर की जुडी की यादें साझा करते हुये बस्तर के सुपरिचित पत्रकार धर्मेन्द्र महापात्र ने फेसबुक पर लिखा है. उनसे जुड़ी ये पुरानी यादें आज बस्तर के कलाकारों के लिए एक अनमोल विरासत बन गई हैं.
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छत्तीसगढ़ के बस्तर से दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर की जुडी की यादें साझा करते हुये बस्तर के सुपरिचित पत्रकार धर्मेन्द्र महापात्र ने फेसबुक पर लिखा है. उनसे जुड़ी ये पुरानी यादें आज बस्तर के कलाकारों के लिए एक अनमोल विरासत बन गई हैं.
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से बस्तर के कलाकार जगत में भी शोक की लहर है. नाना पाटेकर का बस्तर से पुराना और खास जुड़ाव रहा है. वे 1984-85 और फिर 1987-88 में दो बार बस्तर आए थे.
बताया जाता है कि 1984-85 में नाना पाटेकर वार्षिक शाला उत्सव में शामिल होने के लिए बस्तर पहुंचे थे. उस वक्त कुम्हारपारा स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज में उन्होंने दिनभर समय बिताया था. वर्तमान में यह स्थान वन विभाग के विश्राम गृह के रूप में जाना जाता है.
इसके बाद 1987-88 में फिल्म शूटिंग के सिलसिले में उनका दोबारा बस्तर आना हुआ. इस दौरान वे करीब एक महीने तक बस्तर में रहे. गंगा प्रोडक्शन की फिल्म ‘आज की महाभारत’ की शूटिंग बस्तर की खूबसूरत वादियों में की गई थी.
फिल्म की शूटिंग धनपूंजी, देवड़ा मंदिर, चित्रकूट, तीरथगढ़, नया मुंडा और जगदलपुर शहर के अन्य स्थानों पर हुई थी. बस्तर के उड़ीसा बॉर्डर से लगे इलाकों में भी फिल्म के कई दृश्य फिल्माए गए.
फिल्म में नाना पाटेकर के साथ सुरेश ओबेरॉय, दीप्ति नवल, भारत भूषण, नीता पुरी सहित कई अन्य कलाकार भी बस्तर पहुंचे थे.
शूटिंग के दौरान बस्तर के स्थानीय कलाकारों और थिएटर से जुड़े लोगों को इन दिग्गज कलाकारों से मिलने और उनके साथ काम करने का अवसर मिला.

नाना पाटेकर की सहजता और कलाकारों के प्रति अपनापन आज भी बस्तर के रंगकर्मियों की यादों में ताजा है.
नाना पाटेकर के निधन से बस्तर का थिएटर और कलाकार जगत भी गहरे शोक में है. उनसे जुड़ी ये पुरानी यादें आज बस्तर के कलाकारों के लिए एक अनमोल विरासत बन गई हैं.
