एमपी के बक्सवाहा जंगल को बचाने 20 राज्यों के पर्यावरण प्रेमी जुटेंगे

एमपी के छतरपुर जिला में  बक्सवाहा जंगल को बचाने देश भर के कोई 20 राज्यों के पर्यावरण प्रेमी पहुँच कर विरोध प्रदर्शन करेंगे। ज्ञात हो कि साढ़े सात करोड़ की आबादी वाले राज्य मध्यप्रदेश में 75 लाख लोगों को प्राणदायी ऑक्सीजन देने वाला बकस्वाहा जंगल का अस्तित्व खतरे में है।

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deshdigital

महासमुन्द| एमपी के छतरपुर जिला में  बक्सवाहा जंगल को बचाने देश भर के कोई 20 राज्यों के पर्यावरण प्रेमी पहुँच कर विरोध प्रदर्शन करेंगे। ज्ञात हो कि साढ़े सात करोड़ की आबादी वाले राज्य मध्यप्रदेश में 75 लाख लोगों को प्राणदायी ऑक्सीजन देने वाला बकस्वाहा जंगल का अस्तित्व खतरे में है।

उक्त सम्बन्ध में छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले की सीमा से लगे ओडिशा के खरियार रोङ के पर्यावरण प्रेमी मनोज डागा ने बताया कि   एक अनुमान के अनुसार बक्सवाहा के जंगल में 34.2 करोड़ कैरेट के हीरे मिले हैं। हालांकि इन हीरों को पाने के लिए इस जंगल के बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधनों- हर्बल पौधों और अन्य पेड़ों को काटना होगा। खनन परियोजना 382.131 हेक्टेयर की है जिससे जंगल का विनाश तय है।यह जंगल स्थानीय नागरिकों के जीविका का साधन भी है जंगल के प्राकृतिक संसाधन करीब 8,000 आदिवासियों  की आजीविका प्रदान करते हैं।

मनोज डागा ने बताया पर्यावरणीय क्षति और पीढ़ियों से यहां रहने वाले आदिवासी लोगों की बेदखली का हवाला देते हुए वर्ष 2014 में इस परियोजना का जोरदार विरोध किया गया था। लेकिन पुनः वर्ष 2019 में मध्य प्रदेश सरकार ने खनन परियोजना के लिए जंगल की नीलामी का टेंडर जारी किया और आदित्य बिड़ला समूह की एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने सबसे ज्यादा बोली लगाकर निविदा अपने नाम कर ली। मध्य प्रदेश सरकार ने 62.64 हेक्टेयर क़ीमती वन भूमि बिड़ला समूह को अगले पचास वर्षों के लिए पट्टे पर दी है।

प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ सिंह की गलतियों को सुधारने के स्थान पर अब तक कोई सकारात्मक पहल नही की गई है,जिस कारण देश प्रदेश मे खासा आक्रोश व्याप्त है।

डागा ने बताया कि वन विभाग की जनगणना के अनुसार बक्सवाहा के जंगल में 2,15,875 पेड़ हैं। इस उत्खनन को करने के लिए सागौन,केन,बेहड़ा,बरगद, जामून,जम्मू तेंदु,अर्जुन,और अन्य औषधीय पेड़ों सहित जंगल के प्राकृतिक संसाधनों का खजाना, जो कुल मिलाकर 2,15,875 तक है,को काटना होगा। इसके साथ ही वन्य जीव, पशु -पक्षी के साथ 22000 वर्ष पुरानी शैलचित्र का अस्तित्व भी खतरे में आ गया है।

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मनोज डागा ने बताया विगत दो माह पूर्व इसकी कटने की पुनः सूचना मिलते ही देश के पर्यावरण प्रेमियो ने इसके संरक्षण हेतु अभियान चलाया| 5 जून को बक्सबाहा के ग्राम सगोरिया कार्य स्थल पर सैकड़ों पर्यावरण प्रेमी एकत्रित हुए एवं रक्षा सूत्र बांधे गए क्रम क्रम से अनेक संस्थाएं इस दिशा में आंदोलन कर रही हैं और आन्दोलन चल रहा है।

जंगल बचाओ अभियान (विभिन्न संगठनों के राष्ट्रीय समन्वय समिति) का गठन कर सैकड़ो संस्थान एक आवाज में बकस्वाहा जंगल को बचाने की दिशा में एकजुट हुए और आज देश – विदेश के करीब लाखो लोग प्रतिदिन सोशल साइट्स, इलेक्ट्रॉनिक,प्रिंट मीडिया सहित धरातल पर कार्यरत हैं।

इसी अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षकों की एक समूह ने बकस्वाहा जंगल के निरीक्षण कर धरातल की सच्चाई को जाना और तीन दिवसीय यात्रा की घोषणा नर्मदा मिशन के समर्थ सद गुरु भैयाजी सरकार के सानिध्य में की गई जिसमें देश के करीब 20 राज्यों से पर्यावरणविद इस कार्यक्रम में एकत्रित होंगे|

नर्मदा मिशन द्वारा नर्मदा बचाओ अभियान से समर्थ गुरु भैया जी सरकार के संरक्षण में जबलपुर में  01, 02 एवं 03 अगस्त 2021 को होना सुनिश्चित हुआ है। इस कार्यक्रम के तहत सभी पर्यावरण योद्धा 01अगस्त को जबलपुर में एकत्रित होंगे और 02 अगस्त को बकस्वाहा जंगल का भ्रमण के लिए जाएंगे और वही पर बैठक करेंगे, फिर 03 अगस्त को जबलपुर में ही विशाल पर्यावरण संरक्षण हेतु कार्यशाला की जाएगी जिसमें देश के कई बड़े पर्यावरण योद्धा सहित बकस्वाहा जंगल के संरक्षण सहित देश के सभी हिस्सों में प्रकृति संरक्षण हेतु उद्घोष करेंगे।

इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट दिल्ली, हाई कोर्ट मध्यप्रदेश और NGT में दायर मुक़दमे की वकालत कर रहे अधिवक्ताओं का एक समूह भी उपस्थित रहेगा। जो इसकी बारीकियों पर विस्तृत प्रकाश डालेंगे।

इस कार्यक्रम में मध्यप्रदेश से चौधरी भूपेंद्र सिंह प्रताप पर्यावरण एवं शिक्षा समिति मध्य प्रदेश , कमलेश कुमार सिंह उद्घोष फाउंडेशन ,करुणा रघुवंशी,रितिका गुप्ता , गुलाब चन्द अग्रवाल झारखंड बिहार से संजय कुमार बबलू,छतीसगढ़ से सुरेंद्र साहू,खरियाररोड ओडिशा  से मनोज डागा उत्तर प्रदेश से डा टी के सिंन्हा ,कर्नाटक से सुग्गला यल्लामल्ली लाइन एम जे एफ महाराष्ट्र से महेंद्र घाघरे,सहित पर्यावरण प्रेमियों  का विशाल जनसमूह रहेगा  |

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