सावन सूखा, सूखे खेत में पड़ी दरारें,अकाल की छाया

सावन सूखा, सूखे खेत पड़ी दरारें,  खेतों का छत्तीसगढ़ के कई जिलों में इसी तरह के हालत हैं| आसमान के भरोसे रहनेवाले किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं, तो सिंचाई के लिए बोर बिजली कटौती ,लो वोल्टेज से चिंतित किसानों के पसीने छूट रहे हैं | आपासी वाले किसानो की रही सही कसर खाद की कमी ने पूरी कर दी है|

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रायपुर | सावन सूखा, सूखे खेत में पड़ी दरारें,  खेतों का छत्तीसगढ़ के कई जिलों में इसी तरह के हालत हैं| आसमान के भरोसे रहनेवाले किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं, तो सिंचाई के लिए बोर बिजली कटौती ,लो वोल्टेज से चिंतित किसानों के पसीने छूट रहे हैं | आपासी वाले किसानो की रही सही कसर खाद की कमी ने पूरी कर दी है| कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ का किसान इन दिनों  चौतरफा मार झेल रहा है|
हरेली तक ख़त्म हो जाने वाला खेती-किसानी का हाल यह है कि कई जगह बोनी तक नहीं हुई  बियासी तो दूर की बात है | बुवाई हो चुके खेतों में दरारें पड़ चुकी हैं|

महासमुंद जिले की पिथौरा इलाके में  पानी की कमी से कोई 40 फीसदी रोपाई अटकी हुई है वही जिन किसानों ने बोआई और रोपाई की है उनके खेत भी अब पूरी तरह सूख चुके हैं । विगत पखवाड़े भर से बारिश नही होने के कारण अब फसल लगे खेत भी दरकने लगे है ।किसान अपनी बचत का एक हिस्सा अब तक कि जुताई एवम बुआई में खर्च कर चुके हैं|

वरिष्ठ पत्रकार रजिंदर खनूजा, स्थानीय कृषि अधिकारी डी पी पटेल के हवाले से बताते हैं , इस वर्ष विगत वर्ष हुई 428 मि मी वर्षा के मुकाबले मात्र 335 मि मी वर्षा ही रिकॉर्ड की गई है।कुल 48 हजार हेक्टयर क्षेत्र में धान की बोआई की जानी थी परन्तु 44500 हे क्षेत्र में ही बोआई सम्पन्न हुई है।जिसमें  भी असिंचित खेतों की फसल पानी की कमी के कारण सूखने के  कगार पर है। रोपाई  10 हजार हेक्टयर में से   6800 हे ही पूर्ण हो पाई है।इसके अलावा दलहन की बोआई भी लक्ष्य से आधे से भी कम क्षेत्र में पूर्ण हुई है।

रजिंदर खनूजा के मुताबिक इलाके के किसान बेसबी से आसमान की ओर ताक रहे हैं कि अब बारिश हो जाये और उनकी फसल जीवित हो जाये। इस वर्ष खेती अकाल का साया मंडराता दिखने लगा है।

महासमुंद जिले के  बसना ब्लाक की भी हालत अच्छी नहीं है | खाद की कमी के चलते  किसान रोपा बियासी में पिछड़ गए | हरेली से एक दिन पहले भटहोरी के एक किसान  का कहना  था कि खाद की कमी के चलते हम रोपा बियासी मे पिछड़ गए हैं|  वहीँ  जिला सहकारी बैंक बसना के प्रबंधक श्री ए एल जगत ने भी माना कि कहीं-कहीं खाद की कमी है|

रायपुर संभाग के धमतरी जिले  के नगरी ब्लाक के बोराई क्षेत्र के आठ गांवों के किसान  कलेक्टर से मिलाकर क्षेत्र को सूखा घोषित कर प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की गुहार लगा चुके हैं| जिला पंचायत सदस्य मनोज साक्षी की अगुवाई में 11 अगस्त को ग्राम पंचायत मैनपुर के सरपंच भुनेश्वरी नेताम, बोराई सरपंच किरण देवी भोयर,  आदि कलेक्ट्रेट पहुंचे।

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क्षेत्र के ग्राम बोराई, कोटपारा, घुटकेल, लिखमा, मैनपुर, बनियाडीह, एकावारी, गुडरा क्षेत्र के सूखी धान फसल की तस्वीर दिखाकर किसानों ने बताया कि आषाढ़ व सावन  में पर्याप्त बारिश नहीं होने से क्षेत्र के खेतों में लगी धान फसल सूखकर झुलसने लगी है। कई जगह तो नर्सरी की रोपाई तक नहीं हुई है। बोनी  धान के पौधे तेज धूप से सूखकर मरने लगे हैं|  खेतों में दरारें पड़ गई है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से इस साल क्षेत्र में सूखे की स्थिति बनी हुई है।  खेती में  अब तक  वे हजारों रुपये खर्च कर चुके हैं |

बोआई लक्ष्य का 84 प्रतिशत

प्रदेश  के कृषि विभाग से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार 10 अगस्त तक धान, अन्य अनाज के फसलों सहित तिलहन और साग-सब्जी की बुआई 40 लाख 71 हजार 560 हेक्टेयर में हो चुकी है, जो कि चालू खरीफ सीजन के लिए निर्धारित बोआई के लक्ष्य का 84 प्रतिशत है।

अब तक राज्य में 33 लाख 68 हजार हेक्टेयर में धान, 2 लाख 54 हजार 820 हेक्टेयर में अन्य अनाज की फसलों सहित 2 लाख 27 हजार 990 हेक्टेयर में दलहन, एक लाख 21 हजार 480 हेक्टेयर में तिलहनी तथा 99 हजार 270 हेक्टेयर रकबे में साग-सब्जी एवं अन्य फसलों की बुआई पूरी कर ली गई है।

निर्धारित लक्ष्य के विरूद्ध अब तक धान की 91 प्रतिशत, दलहन की 61 प्रतिशत, तिलहन की 48 प्रतिशत तथा साग-सब्जी एवं अन्य फसलों की 75 प्रतिशत बोनी पूरी हो चुकी है।

जून से  अब तक 630.8 मि.मी. औसत बारिश

छत्तीसगढ़राज्य शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा बनाए गए राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष द्वारा संकलित जानकारी के मुताबिक 1 जून 2021 से अब तक राज्य में 630.8 मिमी औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है।

छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में 01 जून से 12 अगस्त तक रिकार्ड की गई वर्षा के अनुसार कोरबा जिले में सर्वाधिक 958.2 मिमी और बालोद जिले में सबसे कम 427.7 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गयी है।
सरगुजा में 562 मिमी, सूरजपुर में 832.1 मिमी, बलरामपुर में 736.8 मिमी, जशपुर में 681.3 मिमी, कोरिया में 734.3 मिमी, रायपुर में 552.2 मिमी, बलौदाबाजार में 629.8 मिमी, गरियाबंद में 539 मिमी, महासमुंद में 515.3 मिमी, धमतरी में 520.1 मिमी, बिलासपुर में 687.9 मिमी, मुंगेली में 613.9 मिमी, रायगढ़ में 553.7 मिमी, जांजगीर चांपा में 647.4 मिमी, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 729.4 मिमी, दुर्ग में 555.4 मिमी, कबीरधाम में 502.2 मिमी, राजनांदगांव में 457.7 मिमी, बेमेतरा में 732.1 मिमी, बस्तर में 498.4 मिमी, कोण्डागांव में 583 मिमी, कांकेर में 521.8 मिमी, नारायणपुर में 708.8 मिमी, दंतेवाड़ा में 566.4 मिमी, सुकमा में 920.7 मिमी और बीजापुर में 696.1 मिमी औसत वर्षा रिकार्ड की गई।

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