नब दास हत्याकांड पर बोले डीजीपी- जांच में लग सकता है और समय

ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री नब किशोर दास की हत्या पर चुप्पी तोड़ते हुए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सुनील बंसल ने शुक्रवार को कहा कि जांच में कुछ समय लगेगा। अभी ही किसी भी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

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भुवनेश्वर। ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री नब किशोर दास की हत्या पर चुप्पी तोड़ते हुए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सुनील बंसल ने शुक्रवार को कहा कि जांच में कुछ समय लगेगा। अभी ही किसी भी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। बंसल ने यहां मीडियाकर्मियों को जानकारी देते हुए कहा कि 29 जनवरी को एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद घटना हुई। हम सभी सदमे की स्थिति में हैं। हम अभी भी सोच रहे हैं कि यह घटना कैसे हुई। क्या इसे रोका जा सकता था? घटना के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि कभी-कभी कुछ ऐसी घटनाएं जिनके बारे में किसी ने कभी सोचा भी नहीं होता, हमारे जीवन में भी घट जाती हैं। भगवान जगन्नाथ के अलावा कोई सोच भी नहीं सकता था कि ऐसी घटना हो सकती है। यह ऐसी घटना है।

 उन्होंने कहा कि घटना की समुचित जांच के लिए तुरंत क्राइम ब्रांच जांच के आदेश दिए गए और एडीजी अरुण बोथरा खुद वहां कैंप कर जांच की निगरानी कर रहे हैं। बोथरा के पास सीबीआई में अनुभव है और उन्हें न केवल ओडिशा में बल्कि पूरे देश में एक सर्वश्रेष्ठ इन्वेस्टिगेटर के रूप में माना जाता है। फिर भी, हमने ओडिशा हाईकोर्ट से एक वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा पूरी जांच प्रक्रिया की निगरानी करने का अनुरोध किया था। तदनुसार, इस मामले को देखने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे.पी. दास को नियुक्त किया गया है।

 उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि कल कोई भी जांच प्रक्रिया में किसी भी तरह के पुलिस हस्तक्षेप की ओर उंगली न उठा सके, हमने एहतियात के तौर पर स्थानीय पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया है। मंत्री के निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) को निलंबित कर दिया गया क्योंकि यह घटना उनकी मौजूदगी में हुई थी। हालांकि कुछ तथ्य सामने आए हैं, लेकिन जांच प्रक्रिया को पूरा करने में अभी कुछ और समय लगेगा।

 बंसल ने कहा क्योंकि ऐसे अपराध के मामलों में कोई भी दो या चार दिनों के भीतर सभी पहलुओं को नहीं समझ सकता है। हमने केंद्रीय वैज्ञानिक फोरेंसिक प्रयोगशाला (सीएसएफएल), नई दिल्ली से संपर्क किया है। गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मैंने व्यक्तिगत रूप से चर्चा की है। स्टेट फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की एक टीम झारसुगुड़ा में डेरा डाले हुए है, वहीं सीएफएसएल की एक टीम जल्द ही अपराध स्थल का दौरा कर सकती है। बर्खास्त आरोपी एएसआई गोपाल दास के हाथ से लिखे कुछ कागजात झारसुगुड़ा एयरपोर्ट थाने के शौचालय से बरामद हुए हैं। इस पर पुलिस महानिदेशक ने कहा कि इसकी फॉरेंसिक जांच से पहले सबूतों के बारे में कोई राय बनाना जल्दबाजी होगी।

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उन्होंने कहा कि जांच अभी भी चल रही है और जांच के लिए सभी विकल्प खुले हैं। हम अपनी सोच बंद नहीं करने जा रहे हैं। अगर हमारे पास कोई सबूत या संकेत मिलता है, तो हम उसे तार्किक निष्कर्ष पर ले जाएंगे।

 अपराध के पीछे के मकसद के बारे में पूछे जाने पर, डीजीपी ने कहा कि मकसद कुछ ऐसा है जो उसके दिमाग में छिपा होता है। ऐसी कोई मशीन नहीं है जो इसे पढ़ सके। हम केवल उसके चेहरे के भाव, व्यवहार और मानसिक स्थिति के बारे में जान सकते हैं। इसलिए मकसद का पता लगाने के लिए अपराध की पूरी परिस्थितियों और अनुक्रम की जांच की जा रही है।

आरोपी के मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के दावों पर टिप्पणी करते हुए बंसल ने कहा कि पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या वह वाकई बाइपोलर डिसार्डर था।

 डीजीपी ने कहा कि ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए ओडिशा पुलिस विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) के साथ चर्चा करेगी, जो प्रधानमंत्री को सुरक्षा प्रदान कर रहा है। ओडिशा के मुख्य पुलिस अधिकारी ने कहा कि हम उनके एसओपी और अच्छी प्रथाओं पर गौर करेंगे और हम इसे अपने सिस्टम में किस हद तक लागू कर सकते हैं इसका प्रयास करेंगे।

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