महासमुंद कांग्रेस में गुटबाजी खुलकर दिखी, प्रभारी महामंत्री के खिलाफ फूटे स्वर

महासमुंद जिला कांग्रेस में जो कुछ चल रहा है वह अच्छा नहीं कहा जा सकता । सत्ता और संगठन में दूरी नजर आती है तो संगठन के अंदर भी तनाव दिख रहा है । बैठक में गुटबाजी खुलकर दिखी जहाँ प्रभारी महामंत्री के खिलाफ स्वर फूटे|

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महासमुंद । छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में कांग्रेसी सबसे मजबूत दिखती है, चार विधायक हैं ,सभी को लालबत्ती मिल गई है । जिले के कई नेताओं को आयोगों में जगह भी मिल गई|  देखा जाए तो राजनीतिक दृष्टि से महासमुंद को सबसे ज्यादा मिला है । इन सबके बावजूद जिला कांग्रेस में जो कुछ चल रहा है वह अच्छा नहीं कहा जा सकता । सत्ता और संगठन में दूरी नजर आती है तो संगठन के अंदर भी तनाव दिख रहा है ।

कांग्रेस का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम बूथ स्तरीय टीम के गठन को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी और प्रदेश के मुखिया बेहद गंभीर हैं पर जिले की बैठक में नजारा कुछ और था ।  जिले में बूथ प्रबंधन को लेकर आयोजित बैठक में राष्ट्रीय सचिव श्री चंदन यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री गिरीश देवांगन ,संगठन प्रभारी महामंत्री श्री चंद्रशेखर शुक्ला ,जिले के संगठन प्रभारी श्री कन्हैया अग्रवाल, विधायक श्री विनोद चंद्राकर ,श्री द्वारिकाधीश यादव, जिला अध्यक्ष श्रीमती रश्मि चंद्राकर सहित कांग्रेस के जिले भर के वरिष्ठ नेता ब्लॉक अध्यक्ष आदि की मौजूदगी में विरोध के स्वर उठने लगे ।

सूत्र बताते हैं इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला महामंत्री संजय शर्मा ने जिले के प्रभारी प्रदेश महामंत्री श्री कन्हैया अग्रवाल को जमकर कोसा। श्री शर्मा ने प्रभारी महामंत्री पर आरोप लगाया कि जिले का दौरा नहीं करते ,कार्यक्रम में नहीं आते, कार्यकर्ताओं का मजाक उड़ाते हैं, कार्यकर्ता की उपेक्षा करते हैं ,संगठन की परेशानियों का निदान नहीं करते, हमारी बात राजधानी तक नहीं पहुंचाते आदि आदि ।

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बागबाहरा ब्लॉक के अध्यक्ष ने तो संगठन को महासमुंद से बाहर पूरे जिले में फैलाने की सलाह दी है तो अन्य नेताओं ने कार्यकर्ताओं और छोटे-छोटे पदाधिकारियों को जिले में किसी भी प्रकार का सरकारी ठेके सप्लाई नहीं मिलने के साथ भाजपा के लोगों को ही कमाई के काम मिलने की शिकायत की ।

राजनीतिक रूप से मजबूत जिले में खुलकर जिले के प्रभारी महामंत्री की आलोचना के साथ कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की शिकायत पर मंच पर मौजूद सारे नेता मौन रहे । सिर्फ बूथ और सरकार की उपलब्धि पर चर्चा कर बैठक समाप्त हुई । लेकिन जो चिंगारी विरोध के रूप में फैलने लगी है उसका असर जरूर दिखेगा कार्यकर्ताओं में भी नेताओं में भी ।

deshdigital के लिए रजिंदर खनूजा

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