कोरोना से दहशत और मुश्किल में हैं माओवादी, 7 कैडर की मौत, 3 गंभीर, 10 संगठन छोड़ भागे

हिंसा से दहशत फ़ैलाने वाले माओवादी इन दिनों  खुद कोरोना संक्रमण  के ख़तरे से  दहशत में हैं|  बस्तर संभाग के खासकर दक्षिण बस्तर इलाके के कई बड़े नक्सली कोरोना से जान गँवा चुके हैं और कुछ की हालत नाजुक है| कोरोना की दहशत के चलते कई के संगठन छोड़ भाग चुके हैं|  

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बस्तर|  हिंसा से खौफ फ़ैलाने वाले  माओवादी  इन दिनों  खुद कोरोना संक्रमण के ख़तरे से  दहशत में हैं|  बस्तर संभाग के खासकर दक्षिण बस्तर इलाके के कई बड़े नक्सली कोरोना से जान गँवा चुके हैं और कुछ की हालत नाजुक है| कोरोना की दहशत के चलते कई  संगठन छोड़ भाग चुके हैं|  कोरोना संक्रमण के ख़तरे से माओवादी बहुत दहशत में है इसका पता चल रहा है| पत्र के मुताबिक यदि यह स्थिति जारी रहेगी तो हमारे लिए बहुत मुश्किल होगा ये बीमारी गांव के जनता से जहर जैसे फैलते जा रहा है। अभी हमारे पास उपलब्ध दवाई से कुछ असर नहीं हो रहा है

दरअसल बस्तर पुलिस ने माओवादियों का एक पत्र बरामद किया है।जिसमें बीमारी का नाम नहीं लिखते हुए माओवादियों ने 7 कैडर की मौत, 3 माओवादियों के गंभीर रूप से बीमार और 10 माओवादियो के संगठन छोड़कर भागने का ज़िक्र किया है।

 इधर दंतेवाड़ा एस पी डॉक्टर अभिषेक पल्लव का का कहना है कि जिन नक्सलियों की मौत हुई है वे दक्षिण बस्तर इलाके के हैं। उनके नामों के बारे में पता किया जा रहा है। पल्लव का दावा है कि सुकमा में तो नक्सलियों ने संक्रमण से लड़ने के लिए वैक्सीन और दवाएं भी मंगवाई हैं। हमारी अपील है कि जो नक्सली बीमार हैं, वे आकर सरेंडर करें, पुलिस उनका इलाज कराएगी।

 

दंतेवाड़ा पुलिस को सूचना मिली है कि कोरोना और फूड पॉइजनिंग अब नक्सलियों के सामने बड़ी मुसीबत बन रही है। जिन नक्सलियों की मौत हुई है, उनमें कुछ बड़े कैडर के बताए जा रहे हैं।पुलिस को यह जानकारी भी मिली है कि कुछ दिन पहले कोंटा और दोरनापाल इलाके में नक्सलियों ने कोरोना वैक्सीन और दवाइयां लूटी थीं।

बता दें इसके पहले दो दिन पहले दक्षिण बस्तर डिवीजन, दरभा डिवीजन और पश्चिम बस्तर डिवीजन में 100 से ज्यादा नक्सलियों के कोरोना संक्रमित होने की जानकारी मिली थी। इनमें 25 लाख रुपये की इनामी सुजाता, जयलाल और दिनेश भी शामिल हैं।

अकेले दक्षिण बस्तर में ही दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिले आते हैं। इन इलाकों में सरकार ने भी  आन्ध्र स्ट्रेन को लेकर अलर्ट जारी किया है। अफसरों ने भी नक्सलियों के उसी स्ट्रेन से संक्रमित होने की आशंका जताई है।

पत्र जस का तस  
प्रिय कामरेड दीदी
और मेरे साथियों सहित  ठीक है। मंदाका बीच-बीच में घुटने में दर्द होने से चलने फिरने में दिक्कत हो रही थी। दो महीने से जड़ी-बूटी से इलाज कराने पर अभी ठीक हो गया संगठन के काम के लिए हम लोग जनता से लगातार संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन साल भर में हमारे इलाकों में 03 कैम्प खुल गये हैं।

पुलिस द्वारा लगातार करने से हमें संपर्क करना कठिन हो रहा है। हमारे एरिया कमेटी क्षेत्र से इस साल 14 लोगों को पुलिस माल भेज दिये इसलिए संगठन का काम काफी प्रभावित हो रहा है। पर देखने के नाम से माड़ा गांव गया था लेकिन वापस नहीं आया बार-बार संदेश भेजने पर भी संपर्क नहीं कर रहा है।

दीदी मुझे आपकी चिंता ज्यादा लग रही है। दो दिन पहले से APT हुई दादा ने बताया था कि दक्षिण बस्तर दरमा एवं पश्चिम बस्तर डिवीजन में हमारे कई साथी बीमारी से लड़ रहे है।

अचानक दक्षिण बस्तर के पी दरभा डिपील CNM कमाण्डर हुगा, बटालियन से देये, गंगा सुदरु, मुन्नी रीना की मौत हो गईरहे थे DVCश सुरेश मोक गंभीरता रहे थे। सभी बीमार लोगों का इलाज आपके लोकेशन पर करता रहे ये जितना सुना हूँ यह बीमारी बहुत जल्दी है और ज्यादा लोगों को दिक्कत होता है।

आप अपने आप को सुरक्षित रख कर काम करने पिछली जोनल मीटिंग में भी इस बीमारी के बारे में सोय करने के लिए मैं बात रखी थी। लेकिन सीनियर जोनल सदस्यों द्वारा उसका अनदेखी की गई आपको होगा इस मुद्दा को लेकर मेरी और के बीच में बहुत बहस हुई यो जोनल कमेटी सदस्यों द्वारा सही जानकारी को नीचे स्तर के बैडर्स नहीं पहुंचा | समाचारों में रोज हजारों लोग में बीमारी से मरने का खबर मिल रहा है। यदि हम जिंदा रहेंगे भी को आगे बढ़ा सकते हैं।

बीमारी के डर से बटालियन के सेक्शन कमाण्डर बुधराम और बिमला भाग गये है। CRC कंपनी से भी दो लोग भाग गये है। गंगालूर एरिया कमेटी से सभी लोग बीमार होने से लादून से रितेश जोगा दोनो भाग गये दरमा डिवीजन से भी नागेश, सुमित्रा, अनिता पार्टी छोड़ दिये है कोन्टा पादून से पेश भी अचानक पर भाग गया है।

यदि यह स्थिति जारी रहेगी तो हमारे लिए बहुत मुश्किल होगा ये बीमारी गांव के जनता से जहर जैसे फैलते जा रहा है। अभी हमारे पास उपलब्ध दवाई से कुछ असर नहीं हो रहा है। दवाई के साथ-साथ राशन सप्लाई पहले जैसा नहीं हो पा रहा है। सब जगह पुलिस द्वारा नाका लगाने से किसी को बताने पर काम नहीं हो रहा है। हमे वैकल्पिक व्यवस्था करना होगा।

पिछले डेढ़ साल से स्थाई नेतृत्व नहीं होने से महत्वपूर्ण निर्णय नहीं हो पा रहा है। दीदी श्रम से कम आपकी बात को सभी सदस्य सुनते हैं आप से उम्मीद है आप इस विषय पर निर्णय लेगी नहीं तो जान बचाने के लिए सभी फैडर्स गांग, परिवार की ओर भागते जायेंगे आप भी अपना स्वास्थ्य का जरूर ध्यान रखना

क्रांतिकारी अभिवादन सहित

कामरेड वि प

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