सरगुजा: टांगरगांव में प्रस्तावित स्टील प्लांट के खिलाफ जनहित याचिका, हाईकोर्ट ने माँगा शासन से जवाब

सरगुजा संभाग के जशपुर इलाके के टांगरगांव में प्रस्तावित स्टील प्लांट के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में जन-सुनवाई को स्थगित करने की मांग की गई है। याचिका पर कोर्ट ने केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, छत्तीसगढ़ के पर्यावरण विभाग, रायगढ़ के क्षेत्रीय पर्यावरण मंडल, क्षेत्रीय पर्यावरण कार्यालय रायगढ़, कलेक्टर रायगढ़, डीएफओ रायगढ़ तथा कुदुरगढ़ी स्टील कम्पनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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बिलासपुर। सरगुजा संभाग के जशपुर इलाके के टांगरगांव में प्रस्तावित स्टील प्लांट के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में जन-सुनवाई को स्थगित करने की मांग की गई है। याचिका पर कोर्ट ने केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, छत्तीसगढ़ के पर्यावरण विभाग, रायगढ़ के क्षेत्रीय पर्यावरण मंडल, क्षेत्रीय पर्यावरण कार्यालय रायगढ़, कलेक्टर रायगढ़, डीएफओ रायगढ़ तथा कुदुरगढ़ी स्टील कम्पनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

बता दें दो दिन पहले जशपुर जिले के कांसाबेल में टाँगरगांव में प्रस्तावित माँ कुदरगढ़ी एनर्जी एन्ड इस्पात कंपनी के खिलाफ विशाल रैली निकली । पर्यावरण विभाग ने इसे लाल सूची में रखा है|

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ज्ञात हो कि 4 अगस्त को इस प्लांट को स्थापित करने के लिये पर्यावरणीय जन-सुनवाई रखी गई है। हाईकोर्ट में 2 अगस्त को याचिका की सुनवाई की अगली तारीख तय की गई है।

जशपुर की जनजातीय सुरक्षा मंच ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में कुदरगढ़ी स्पंज आयरन तथा डीआरआई प्लांट, बिंलेट स्टील मेकिंग शॉप, फर्नेश प्लांट, रोलिंग मिल, कैप्टिव पॉवर प्लांट की स्थापना पर भी रोक लगाने की मांग की है।

याचिका में बताया गया है कि उक्त प्लांट की स्थापना के विरोध में ग्रामीणों ने कलेक्टर, पर्यावरण विभाग व अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को शिकायत की गई थी लेकिन उनके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं करने के कारण याचिका दायर की जा रही है। याचिका में कहा गया है कि प्रोजेक्ट की मंजूरी, अनापत्ति, दावा-आपत्ति के प्रावधानों का पालन किये बगैर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उक्त जन-सुनवाई रखी जा रही है। वन विभाग की ओर से अब तक अनापत्ति प्रमाण-पत्र नहीं लिया गया है। इस क्षेत्र में अघोषित हाथी कॉरिडोर है तथा अन्य वन्य जीवों की बसाहट है। अनेक औषधियों की भी यहां पैदावार है। प्लांट की स्थापना से ये नष्ट होंगे। स्थानीय लोगों को इसका दुष्परिणाम भोगना होगा।

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