हसदेव अरण्य पर चलने लगी आरियाँ, बिछने लगी पेड़ों की लाशें  

राहुल गाँधी के भरोसे, आदिवासियों के भारी विरोध, विशेषज्ञों की सलाह को दरकिनार कर छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार द्वारा राजस्थान सरकार को आबंटित हसदेव अरण्य स्थित परसा कोयला खदान की स्वीकृति के बाद पेड़ों की कटाई शुरू हो गई है | जहाँ आदिवासियों का विरोध अब भी जारी है वहीँ सुरक्षा के साये में पेड़ों पर आरियाँ चल रही हैं | मध्य भारत का फेफड़ा कहे जाने वाले हसदेव अरण्य में कोयले के लिए करीब 2 लाख पेड़ों की बलि चड़ने वाली है |

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राहुल गाँधी के भरोसे, आदिवासियों के भारी विरोध, विशेषज्ञों की सलाह को दरकिनार कर छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार द्वारा राजस्थान सरकार को आबंटित हसदेव अरण्य स्थित परसा कोयला खदान की स्वीकृति के बाद पेड़ों की कटाई शुरू हो गई है | जहाँ आदिवासियों का विरोध अब भी जारी है वहीँ सुरक्षा के साये में पेड़ों पर आरियाँ चल रही हैं | मध्य भारत का फेफड़ा कहे जाने वाले हसदेव अरण्य में कोयले के लिए करीब 2 लाख पेड़ों की बलि चड़ने वाली है |

परसा कोल खदान के लिए साल्ही ग्राम के बूढ़ा दायर जंगल मे वन अमला द्वारा पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में सैकड़ों वर्ष पुराने साल सहित अन्य पेड़ों को काटने का काम धड़ल्ले से जारी है।

उदयपुर के पत्रकार क्रांतिकुमार रावत जानकारी देते बताते हैं , इस मामले में सबसे खास बात यह है ग्रामीणों द्वारा कोल खदान के विरोध में लगातार धरना दिया जा रहा है| चिपको आंदोलन करके पेड़ों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है तो वहीँ  वन अमला द्वारा भोर में 4 बजे से  मशीनों से पेड़ों की कटाई की जा रही है|

कुछ ही घंटों में वन अमला ने काटे 300 पेड़
कोल प्रभावित ग्राम साल्ही जनार्दनपुर में वन अमला द्वारा पेड़ों की कटाई का काम मंगलवार को शुरू किया गया जिसका ग्राम साल्ही हरिहरपुर और फतेहपुर के ग्रामीणों ने जमकर विरोध दर्ज कराते हुए पेड़ों की कटाई का काम रोक दिया है।
एक ओर जहां सरगुजा जिले के ग्रामीणों द्वारा परसा कोल खदान का लगातार विरोध किया जा रहा है धरना प्रदर्शन भी इस बारे में जारी है तो वहीं इसी कोल परियोजना के सूरजपुर जिले में आने वाले प्रभावित ग्राम जनार्दनपुर के जंगल में कटाई का काम मंगलवार को वन विभाग द्वारा शुरू किया गया था।

ग्रामीणों ने किया विरोध
लोगों की जब आंख खुली तो देखा कि चारों और जंगल में पेड़ कटे हुए पड़े हुए हैं इसे देखते हुए ग्रामीणों का आक्रोश भड़क उठा और पेड़ों की कटाई में लगे लोगों को पेड़ काटने से सैकड़ों की संख्या में इकट्ठा होकर मना किया ।
पेड़ काटने से रोके जाने के बाद सूरजपुर जिला प्रशासन के लोग ग्राम साल्हि जनार्दनपुर के जंगल पहुंच गए और ग्रामीणों से बातचीत करने लगे परंतु प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बातचीत का नतीजा नहीं निकला ।
ग्रामीणों ने एक सुर में कहा हम किसी भी सूरत में जंगल नहीं कटने देंगे। विदित हो कि सरगुजा जिले का साल्ही और सूरजपुर जिले का जनार्दन पुर का जंगल आपस में लगा हुआ है।

300 पेड़ों की कटाई
इस बारे में बात करने पर रामानुजनगर वन परिक्षेत्राधिकारी आरसी प्रजापति ने बताया कि मंगलवार को लगभग 300 पेड़ों की कटाई की गई है। ग्रामीणों द्वारा विरोध किये जाने के बाद पेड़ों की कटाई का काम फिलहाल बन्द किया गया है। कुल 1586 पेड़ों को काटे जाने की बात भी वनपरिक्षेत्राधिकारी द्वारा बताई गई है। साथ ही उन्होंने ने कहा उच्चाधिकारियों से निर्देश प्राप्त होने के बाद आगे कि कार्यवाही की जाएगी।

ग्राम साल्ही जनार्दनपुर जंगल में इस दौरान लगभग 50 से अधिक की संख्या में पुलिस बल चौकी तारा प्रभारी के नेतृत्व तैनात रहे। बातचीत के लिए पहुंचे अधिकारियों में एसडीएम सूरजपुर एसडीओपी प्रेमनगर तहसीलदार तथा अन्य लोग मौजूद रहे|

देखें वीडियो:

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बता दें सरगुजा के इस कोयला खदान का ग्रामीण –आदिवासी दशकों से विरोध करते आ रहे हैं|  वर्ष 2019 में करीब 70 दिन तक इसके विरुद्ध में आंदोलन चला इस पर बात नहीं बनी तो लोग 300 किलोमीटर पैदल चलकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की| यहां भी सुनवाई नहीं होने पर ग्रामीणों ने 02 मार्च 2022 से ग्राम हरिहरपुर में परसा कोल ब्लॉक के विरोध में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन पर हैं ।

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक  वन भूमि डायवर्सन की प्रक्रिया में प्रभावित ग्राम साल्ही हरिहरपुर फतेहपुर की ग्राम सभा में फर्जी ग्राम सभा प्रस्ताव के दस्तावेज का उपयोग कर वन स्वीकृति हासिल की गई है। जिसका विरोध प्रभावित ग्राम के लोग लगातार कर रहे हैं |

ताजा घटनाक्रम पर  सोशल मीडिया में  प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है | छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार आलोक पुतुल ने ट्विट किया –

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक मंडल सदस्य आलोक शुक्ला  ने ट्विट किया है –

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