स्विट्जरलैंड नेशनल बैंक (एसएनबी) की 19 जून 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, स्विस बैंकों में भारतीय धन 2024 में तिगुना होकर CHF 3.5 अरब (37,600 करोड़ रुपये) तक पहुंच गया, जो मुख्य रूप से बैंकिंग चैनलों के जरिए बढ़ा.
पिछले साल 2023 में 70% की गिरावट के बाद भारतीय जमा चार साल के निचले स्तर CHF 1.04 अरब पर था. 2024 में बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा स्थानीय शाखाओं और वित्तीय संस्थानों के जरिए आया, जो CHF 427 मिलियन से बढ़कर CHF 3.02 अरब हो गया. हालांकि, ग्राहक जमा केवल 11% बढ़कर CHF 346 मिलियन (3,675 करोड़ रुपये) हुआ, जो कुल का दसवां हिस्सा है.
फिड्यूशियरी ट्रस्ट CHF 41 मिलियन तक बढ़ा, जबकि बॉन्ड और सिक्योरिटीज CHF 135 मिलियन तक घट गया. स्विस अधिकारियों का कहना है कि ये भारतीय ग्राहकों के प्रति कुल देनदारियां हैं, न कि काला धन. 2018 से लागू भारत के साथ स्वचालित सूचना आदान-प्रदान समझौता हर साल खाता विवरण साझा करता है, और भारत द्वारा सबूत देने के बाद सैकड़ों मामले वित्तीय अपराध के संदेह में जांचे गए.
एसएनबी डेटा तीसरे देश के जरिए निवेश को बाहर रखता है. एक स्विस बैंकिंग अधिकारी ने कहा, “यह बढ़ोतरी संस्थागत प्रवाह से है, न कि व्यक्तिगत संचय, और यह पारदर्शी है.” हालांकि, कुछ भारतीय विश्लेषकों का मानना है कि जटिल बैंकिंग चैनलों के कारण सारा धन ट्रेस नहीं हो सकता.
वैश्विक बैंक जमा में भारत 2023 के 67वें स्थान से 2024 में 48वें स्थान पर पहुंचा, जबकि यूके (CHF 222 अरब) पहले और अमेरिका (CHF 89 अरब) दूसरे स्थान पर है.
इस नाटकीय उछाल से वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं. कर जांच के बीच, यह डेटा मजबूत निगरानी की जरूरत को रेखांकित करता है ताकि अनुपालन सुनिश्चित हो और अवैध धन प्रवाह रोका जा सके.
