भारत-तुर्की संबंधों में संवेदनशीलता पर जोर, पाकिस्तान को आतंकवाद रोकने की सलाह

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भारत ने तुर्की से आग्रह किया है कि वह अपने मित्र देश पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद को समाप्त करने और इसके लिए जिम्मेदार ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए दबाव डाले. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को नई दिल्ली में एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि देशों के बीच संबंध एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता पर आधारित होते हैं. यह बयान हाल ही में तुर्की द्वारा भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान पाकिस्तान का समर्थन किए जाने के बाद उपजी स्थिति के संदर्भ में आया है.

पहलगाम हमले के बाद तुर्की के रुख को लेकर भारत में व्यापक नाराजगी देखी गई. जायसवाल ने इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच आपसी हितों का सम्मान करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि तुर्की पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ ठोस और सत्यापनीय कदम उठाने के लिए प्रेरित करेगा, जो दशकों से आतंकी गतिविधियों को पनाह देता रहा है.”

सूत्रों के अनुसार, 8-9 मई 2025 की रात को पाकिस्तान द्वारा भारतीय सैन्य ठिकानों और नागरिकों पर किए गए ड्रोन हमलों में इस्तेमाल किए गए ड्रोन तुर्की निर्मित “एसिसगार्ड सोंगार” मॉडल के थे. इन ड्रोनों का उपयोग निगरानी और सटीक हमलों के लिए किया जाता है. इतना ही नहीं, कुछ तुर्की ऑपरेटरों ने इन ड्रोन हमलों में पाकिस्तान की सहायता की थी, जो भारतीय नागरिकों और सैनिकों को निशाना बनाने के लिए किए गए थे.

भारत सरकार के सूत्रों ने इसे एक ऐसे देश से अप्रत्याशित व्यवहार बताया, जिसकी 2023 के भूकंप के दौरान भारत ने तत्काल सहायता की थी. फरवरी 2023 में तुर्की में आए विनाशकारी भूकंप, जिसमें 50,000 से अधिक लोगों की जान गई थी, के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन दोस्त’ शुरू किया था. इसके तहत भारत ने एनडीआरएफ दलों, चिकित्सा कर्मियों और उपकरणों को तुर्की भेजा था. साथ ही, गरुड़ा एयरोस्पेस के ड्रोनी ड्रोन का उपयोग मलबे में फंसे लोगों को खोजने और दवाइयां, भोजन व अन्य सामग्री पहुंचाने के लिए किया गया था.

हाल ही में, भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में तुर्की की कंपनी सलेबी एविएशन की सुरक्षा मंजूरी रद्द कर दी. यह कंपनी भारतीय हवाई अड्डों पर यात्री और कार्गो हैंडलिंग सेवाएं प्रदान करती है. इस निर्णय की जानकारी 15 मई को जारी एक सरकारी आदेश में दी गई. इसके अलावा, आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी रुड़की जैसे कई भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों ने पाकिस्तान का समर्थन करने के कारण तुर्की के विश्वविद्यालयों के साथ अपने शैक्षणिक संबंध निलंबित कर दिए हैं.

सलबी एविएशन के मुद्दे पर जायसवाल ने कहा कि इस मामले पर नई दिल्ली में तुर्की दूतावास के साथ चर्चा हुई है, लेकिन यह निर्णय नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) द्वारा लिया गया है.

भारत और तुर्की के बीच यह तनाव दोनों देशों के लिए एक संवेदनशील दौर से गुजर रहा है. भारत ने स्पष्ट किया है कि वह आपसी सम्मान और सहयोग की भावना को महत्व देता है, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ कठोर रुख बनाए रखेगा.

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