देश के 9 राज्यों में डेंगू का कहर ,केंद्र ने भेजी टीम

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक उच्चस्तरीय टीम को उन 9 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को तुरंत रवाना कर दिया है, जहां डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह दल इन राज्यों में डेंगू के असरदार नियंत्रण और प्रबंधन में जन स्वास्थ्य उपाय करने में सहायता करेंगे।

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नई दिल्ली | केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक उच्चस्तरीय टीम को उन 9 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को तुरंत रवाना कर दिया है, जहां डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह दल इन राज्यों में डेंगू के असरदार नियंत्रण और प्रबंधन में जन स्वास्थ्य उपाय करने में सहायता करेंगे। यह निर्णय एक नवंबर, 2021 को डेंगू के हालत की समीक्षा करने के लिये बुलाई गई बैठक के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री मनसुख मंडाविया के निर्देश पर लिया गया है। जिन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, उनमें हरियाणा, केरल, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली तथा जम्मू एवं कश्मीर शामिल हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य मंत्रालय को निर्देश दिया है कि जिन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में डेंगू के मामले अधिक आ रहे हैं, वहां फौरन सहायता पहुंचाई जाये। पूरे देश में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में डेंगू के कुल 1,16,991 मामले सामने आ चुके हैं।

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पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में इस बार अक्टूबर माह में कुछ राज्यों में डेंगू के मामलों में ज्यादा बढ़ोतरी देखी जा रही है। कुल 15 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में इस वर्ष डेंगू के मामले सबसे ज्यादा हैं। उल्लेखनीय है कि 31 अक्टूबर तक देश में डेंगू के कुल मामलों का 86 प्रतिशत मामले इन्हीं राज्यों में दर्ज किये गये हैं।

उपरोक्त को ध्यान में रखते हुये केंद्रीय टीमों में राष्ट्रीय वैक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीबीडीसीपी), राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) और क्षेत्रीय कार्यालयों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इन टीमों को उन नौ राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को रवाना किया गया है, जहां सितंबर की तुलना में अक्टूबर में डेंगू के ज्यादा मामले आ रहे हैं।

टीमों को दायित्व सौंपा गया है कि वे जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में कारगर तरीके से काम करने में राज्यों की सहायता करें। टीमों को आदेश दिया गया है कि वे वैक्टर नियंत्रण, किट्स और दवा की उपलब्धता, रोग का शुरूआत में ही पता लगाने, कीटनाशकों की उपलब्धता और उनके इस्तेमाल, मच्छर के लार्वा की स्थिति, वयस्क मच्छर द्वारा रोग फैलाने पर काबू पाने के उपायों की स्थिति आदि पर रिपोर्ट देते रहें। ये टीमें राज्य स्वास्थ्य अधिकारियों को अपने निष्कर्षों से भी अवगत कराती रहेंगी।

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