कोरोना वैक्सीन से डरिये नहीं, जरुर लगवाइए …

कोविशिल्ड और कोवेक्सीन में अंतर क्या है?   क्या ये पूर्ण रूप से सुरक्षित है?

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कोरोना महामारी पर नियंत्रण के लिए दुनिया के कई देशों में टीकाकरण अभियान शुरू हो चुके हैं.भारत में भी 16 जनवरी 2021 को ऑक्सफ़ोर्ड व् एस्ट्राजेनिका से मिल कर सीरम इंस्टिट्यूट में विकसीत की गयी कोविशिल्ड वैक्सीन और एमर्जेंसीय केस में भारत बॉयोटेक द्वारा निर्मित कोवेक्सीन के प्रयोग को सरकार द्वारा अनुमति प्रदान कर दी गयी है। हालांकि वैक्सीन को लेकर अभी भी लोगों के मन में कई तरह के संशय हैं।

-डॉ सुष्मिता खनूजा गुम्बर

कोरोना महामारी पर नियंत्रण के लिए दुनिया के कई देशों में टीकाकरण अभियान शुरू हो चुके हैं.भारत में भी 16 जनवरी 2021 को ऑक्सफ़ोर्ड व् एस्ट्राजेनिका से मिल कर सीरम इंस्टिट्यूट में विकसीत की गयी कोविशिल्ड वैक्सीन और एमर्जेंसीय केस में भारत बॉयोटेक द्वारा निर्मित कोवेक्सीन के प्रयोग को सरकार द्वारा अनुमति प्रदान कर दी गयी है। हालांकि वैक्सीन को लेकर अभी भी लोगों के मन में कई तरह के संशय हैं।

वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित हैं, दोनों वैक्सीन बहुत कठिन चरणों से गुजरने के बाद ही अप्रूव (मंजूर) हुई हैं। वैक्सीन के अप्रूवल की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। अगर लोग बहकावे में आकर वैक्सीन नहीं लगवाएंगे तो आगे महामारी को रोकना कठिन हो सकता है। अगर आप यह सोच रहे हैं कि इम्यूनिटी मजबूत है, संक्रमण होने पर कुछ नहीं होगा, तो ऐसा नहीं है।

कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर कोई भी व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार पड़ सकता है, जान भी जा सकती है, इसलिए वैक्सीन से दूर मत भागें।मैंने खुद वैक्सीन लगवाई है और मैं खुद पूर्ण रूप से स्वथ्य हूँ।

हमारे देश में ही नहीं, बल्कि कई देशों में ऐसा हमेशा से होता आया है कि प्रारंभ में लोगो को वैक्सीन के प्रति डर रहता है। आप पोलियो वैक्सीन को ही ले लीजिए। शुरू-शुरू में कुछ लोग थे जिन्होंने वैक्सीन के प्रति झिझक दिखाई, लेकिन आगे चलकर जब वैक्सीन के फायदे दिखे, तो लोग टीकाकरण में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने लगे। उसी की परिणाम है कि आज पोलियो हमारे देश में जड़ से खत्म हो चुका है।

इसी प्रकार अगर कोरोना को जड़ से उखाड़ कर फेंकना है, तो सभी को वैक्सीन के प्रति सकरात्मक सोच रखनी होगी और नंबर आने पर टीका लगवाना होगा।

  कोविशिल्ड और कोवेक्सीन में अंतर क्या है?   क्या ये पूर्ण रूप से सुरक्षित है?

कोवैक्सीन एक प्रकार का किल्ड वायरस है, उससे कभी कोरोना नहीं हो सकता है। इस वैक्सीन से कोरोना वायरस को खतरा है, न कि हमें। कोविशील्ड एक जेनेटिक वैक्सीन है, यानी न्यूक्लिक एसिड वैक्सीन है, इसमें एक हार्मलेस (नुकसान न पहुंचाने वाला) एडीनो वायरस हमारे शरीर में इंजेक्ट किया जाता है, जो हमारे शरीर को एंटीबॉडी बनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। दोनों वैक्सीन हजारों लोगों को दी जा चुकी है, इसकी सुरक्षा में कोई संशय नहीं है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि संक्रमण को रोकने के लिए कम से कम 65-70 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन लगानी होगी, जिसका मतलब है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को टीका लगवाने के लिए प्रेरित करना होगा।संक्षेप में कहें तो लोगों के टीकाकरण से कोविड-19 को फैलने से रोका जा सकेगा और दुनिया हर्ड इम्यूनिटी की ओर बढ़ेगी और हर्ड इम्यूनिटी के ज़रिये ही दुनिया सामान्य जीवन में दोबारा लौट पायेगी।

मैंने टीका लगवाया है,आप भी लगवाइए।

(लेखिका डॉ सुष्मिता खनूजा गुम्बर, बिलासपुर में आयुष चिकित्सा अधिकारी हैं , ये इनके निजी विचार हैं )

 

 

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