कलयुग में शिव का नाम ही कल्याणकारी :पंडित भागीरथी

कलयुग में शिव का नाम ही लोक कल्याण का पर्याय है श्रावण मास में शिव पूजन की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है. व्यासपीठ से पंडित दुबे ने शिवपुराण की महत्ता प्रतिपादित करते हुए यह बातें कहीं.   

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पिथौरा|कलयुग में शिव का नाम ही लोक कल्याण का पर्याय है श्रावण मास में शिव पूजन की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है. व्यासपीठ से पंडित दुबे ने शिवपुराण की महत्ता प्रतिपादित करते हुए यह बातें कहीं.

श्रावण मास प्रारंभ होते ही शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ बढ़ गई है. थानेश्वर मंदिर पिथौरा में पहले दिन से ही दिन भर भक्तों के द्वारा पूजन पाठ किया जा रहा है. साथ ही थानेश्वर मंदिर में अनेक धार्मिक आयोजन संपन्न किए जा रहे हैं.

इसी कड़ी में पंच दिवसीय महामृत्युंजय जाप संपन्न किया गया तथा शिव पुराण कथा प्रवचन का आयोजन प्रतिदिन किया जा रहा है. अधिक मास के कारण 2 महीने तक चलने वाले शिव पुराण कथा को कई विद्वान आचार्यों के द्वारा कथा के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है.

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इस सप्ताह इस क्रम में पंडित भागीरथी दुबे के द्वारा शिव पुराण की संगीतमय कथा सुनाई जा रही है. व्यासपीठ से पंडित दुबे ने शिवपुराण की महत्ता प्रतिपादित करते हुए कहा कि कलयुग में शिव का नाम ही लोक कल्याण का पर्याय है. श्रावण मास में शिव पूजन की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है.

उन्होंने शिवलिंग निर्माण की विधियों को बताते हुए कहा कि अनेक धातुओं से शिवलिंग का निर्माण किया जा सकता है किंतु मिट्टी का शिवलिंग अर्थात पार्थिव शिवलिंग सर्वोत्तम है. पार्थिव शिवलिंग की महत्ता शिव पुराण में भी कही गई है.

कथा का आध्यात्मिक विवेचन करते हुए पंडित भागीरथी दुबे ने कहा कि अब समय आ गया है कि घर में मंदिर बनाने की बजाएं घर को मंदिर बनाया जाए जिस घर में पत्नी को पति देव स्वरूप दिखने लगे पति को पत्नी देवी स्वरूप लगने लगे बुजुर्ग माता-पिता को पूजनीय समझा जाने लगे. नन्हे-मुन्ने बच्चों में बाल गोपाल के दर्शन होने लगे. समझ जाओ वह घर अपने आप में मंदिर की तरह हो गया.

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