कोरोना की चुनौती का इस तरह करें सामना , बचें तनाव से  

कोरोना की चुनौती का सामना आज हम सब कर रहे हैं। कोरोना  के फैलाव की शुरुवात से ले कर अब तक दुनियाँ भर के कई देशों में मानसिक रोगों के बढ़ने की संख्या में 50 प्रतिशत तक वृद्धि आयी है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, युवा वर्गों और स्वास्थ्य कर्मियों पर देखने को मिल रहा है।वायरस का प्रभाव मानसिक और भावनात्मक रूप से बहुत ज्यादा हो रहा। लेकिन अपने आप को मानसिक रूप से मजबूत रखने की इस समय की सबसे बड़ी जरूरत है|

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कोरोना की चुनौती का सामना आज हम सब कर रहे हैं। कोरोना  के फैलाव की शुरुवात से ले कर अब तक दुनियाँ भर के कई देशों में मानसिक रोगों के बढ़ने की संख्या में 50 प्रतिशत तक वृद्धि आयी है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, युवा वर्गों और स्वास्थ्य कर्मियों पर देखने को मिल रहा है।वायरस का प्रभाव मानसिक और भावनात्मक रूप से बहुत ज्यादा हो रहा। लेकिन अपने आप को मानसिक रूप से मजबूत रखने की इस समय की सबसे बड़ी जरूरत है|

–  डॉ सुष्मिता खनूजा “गुम्बर”

कोरोना की चुनौती का सामना आज हम सब कर रहे हैं। कोविड महमारी का असर न सिर्फ लोगों के शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है,बल्कि इससे लोगों के मानसिक स्तर पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।

लंबे समय तक क्वारंटाइन रहना, कोरोना में अपनों के खोने का दुःख,कई लोगों की नौकरी जाने और आमदनी कम होने का सदमा,मनचाही जगहों पर आवाजाही हेतु प्रतिबंध,सामाजिक पारिवारिक मेलजोल में कमी और लगातार भविष्य का डर बना हुआ है|

कोरोना  के फैलाव की शुरुवात से ले कर अब तक दुनियाँ भर के कई देशों में मानसिक रोगों के बढ़ने की संख्या में 50 प्रतिशत तक वृद्धि आयी है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, युवा वर्गों और स्वास्थ्य कर्मियों पर देखने को मिल रहा है।वायरस का प्रभाव मानसिक और भावनात्मक रूप से बहुत ज्यादा हो रहा। लेकिन अपने आप को मानसिक रूप से मजबूत रखने की इस समय की सबसे बड़ी जरूरत है|

दिनचर्या और खान पान में कुछ परिवर्तन कर हम अपने मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित होने से बचा सकते हैं|

सोशल मिडिया हो, न्यूज़ चैनल हो या अख़बार हो इनसे लगातार नकारात्मक जानकारियां आ रही हैं| इतनी ज़्यादा नकारात्मक ख़बरें और सूचनाएं मिलने से हमारे शरीर में तनाव पैदा करने वाला मैकेनिज्म एक्टिवेट हो जाता है| इससे व्यक्ति हाइपरअराज़ल की स्थिति में पहुँच जाता है|

इसमें दिमाग़ अलार्म देने लगता है कि बहुत मुश्किल स्थिति है जैसे आप जंगल में हैं और सामने शेर आ गया हो| एकदम से शरीर के सारे सिस्टम एक्टिवेट हो जाते हैं कि इस हालत में क्या करना है| अब ये स्थिति नकारात्मक सूचनाओं को लगातार ग्रहण करने से घर बैठे-बैठे हो रही है भले ही आप बीमार हैं या नहीं| ऐसे हार्मोन्स रिलीज़ हो रहे हैं जिनसे शरीर में तनाव पैदा हो रहा है| इस तनाव का मुख्य असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ रहा।

मानसिक तनाव की स्थिति से बाहर निकलना बहुत ज़रूरी है वरना तनाव अंतहीन हो सकता है। आप कुछ तरीक़ों से ख़ुद को शांत रख सकते हैं ताकि आप स्वस्थ रहें|

  • 1,ख़ुद को मानसिक रूप से मज़बूत करना ज़रूरी है| आपको ध्यान रखना है कि सबकुछ फिर से ठीक होगा और पूरी दुनिया इस कोशिश में जुटी हुई है| बस धैर्य के साथ इंतज़ार करें|
  • 2, अपने रिश्तों को मज़बूत करें| छोटी-छोटी बातों का बुरा ना मानें| एक-दूसरे से बातें करें और सदस्यों का ख़्याल रखें| निगेटिव बातों पर चर्चा कम करें|
  • 3,घर से बाहर तो नहीं निकल सकते लेकिन, छत पर, खिड़की पर, बालकनी या घर के बगीचे में आकर खड़े हों| सूरज की रोशनी हमारे मानसिक स्वास्थ्य को बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • 4,अपनी दिनचर्या को बनाए रखें. योग,प्राणायाम,आसन और सामान्य महसूस होता है. हमेशा की तरह समय पर सोना, जागना, खाना-पीना और व्यायाम करें|
  • 5,एक महत्वपूर्ण तरीक़ा ये है कि इस समय का इस्तेमाल अपनी हॉबी पूरी करने में करें| वो मनपसंद काम जो समय न मिलने के कारण आप ना कर पाए हों, इससे आपको बेहद ख़ुशी मिलेगी जैसे कोई अधूरी इच्छा पूरी हो गई है|
  • 6,अपनी भावनाओं को ज़ाहिर करना प्रारम्भ करे। अगर डर, उदासी है तो अपने अंदर छुपाएं नहीं बल्कि परिजनों या दोस्तों के साथ शेयर करें| जिस बात का बुरा लगता है, उसे पहचानें और ज़ाहिर करें, लेकिन वो ग़ुस्सा कहीं और ना निकालें|
  • 7,भले ही आप परिवार के साथ घर पर रह रहें फिर भी अपने लिए कुछ समय ज़रूर निकालें| ध्यान और योग पर समय दे।आप जो सोच रहे हैं उस पर विचार करें| अपने आप से भी सवाल पूछें| जितना हो पॉजिटिव नतीजे पर पहुंचने की कोशिश करें|
  • 8, प्रतिदिन का कुछ लक्ष्य बना ले जैसे किताब पढ़ना, पेंटिंग करना,गाना गाना, कुछ वाद्य यंत्र बजाना।

सबसे बड़ी बात बुरे वक़्त में भी अच्छे पक्षों पर ग़ौर करना है| जैसे अभी महामारी है, लॉकडाउन है लेकिन इस बीच आपके पास अपने परिवार के साथ बिताने के लिए, अपनी हॉबी पूरी करने के लिए काफ़ी वक़्त है| इस मौक़े पर भी ध्यान दें| प्राणायाम और श्वास प्रश्वास की क्रिया पर ध्यान दे., जिससे कोविड से कमजोर हुए फेफड़ो के साथ साथ मानसिक स्वास्थ्य भी सही बना रहेगा। मन मजबूत तो तन मजबूत..  कोरोना को हराना है तो सकरात्मक विचारधारा के साथ हिम्मत से लड़ना होगा.|

(लेखिका मस्तूरी बिलासपुर में  आयुष चिकित्सा अधिकारी हैं)
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