देहरादून: उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को राज्य के मदरसों के पाठ्यक्रम में शामिल करने की घोषणा की है. यह कदम छात्रों में देशभक्ति और भारतीय सेना के पराक्रम के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है. बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने बताया कि यह पाठ्य सामग्री इंटरमीडिएट स्तर तक के छात्रों को पढ़ाई जाएगी, ताकि वे देश की सुरक्षा के लिए किए गए साहसिक सैन्य अभियानों को समझ सकें.
ऑपरेशन सिंदूर, जिसे भारतीय सेना ने 7 मई 2025 को शुरू किया था, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया था. इस हमले में 26 लोग, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे, मारे गए थे. भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया, जिसे पाकिस्तान ने खारिज किया था. ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया, जिसमें मुरिदके और बहावलपुर जैसे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख केंद्र शामिल थे. इस अभियान में भारतीय सेना ने पिनाका रॉकेट लांचर और स्वदेशी आकाशतीर वायु रक्षा प्रणाली जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया.
मुफ्ती कासमी ने नई दिल्ली में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात के बाद इस पहल की घोषणा की. उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि हमारे छात्र यह जानें कि ऑपरेशन सिंदूर क्यों शुरू किया गया और इसने आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ता को कैसे प्रदर्शित किया.” उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने बताया कि एक मदरसे को इस दिशा में ‘मॉडल मदरसा’ के रूप में विकसित किया गया है, और जल्द ही राज्य के 117 पंजीकृत मदरसों में इस मॉडल को लागू किया जाएगा.
इसके अलावा, राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों में भी ऑपरेशन सिंदूर को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग उठ रही है. राजस्थान सरकार ने इस दिशा में कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है, जबकि बिहार में जनता दल (यूनाइटेड) ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल छात्रों में राष्ट्रीय एकता और सैन्य इतिहास के प्रति सम्मान को बढ़ावा देगी.
हालांकि, कुछ शिक्षाविदों ने इस कदम पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि पाठ्यक्रम में सैन्य अभियानों को शामिल करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह सामग्री तथ्यात्मक और निष्पक्ष हो, ताकि छात्रों में संतुलित दृष्टिकोण विकसित हो. उत्तराखंड मदरसा बोर्ड ने आश्वासन दिया है कि पाठ्यक्रम को एक समिति की देखरेख में तैयार किया जाएगा, जो इसकी गुणवत्ता और निष्पक्षता सुनिश्चित करेगी.
यह निर्णय उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लिया गया है, जिनके परिवार का सैन्य पृष्ठभूमि से गहरा नाता है. बोर्ड का मानना है कि यह कदम न केवल छात्रों को देश की सैन्य उपलब्धियों से परिचित कराएगा, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित भी करेगा.
