परसा कोल खदान के विरोध में गहलोत एवं अडानी का फूंका पुतला : VIDEO

परसा कोल खदान के विरोध में विकासखंड उदयपुर के ग्राम हरिहरपुर में आज हसदेव अरण्य के आदिवासियों  ने गहलोत एवं अडानी का  पुतला फूंक,  प्रदर्शन किया |

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उदयपुर| परसा कोल खदान के विरोध में विकासखंड उदयपुर के ग्राम हरिहरपुर में आज हसदेव अरण्य के आदिवासियों  ने गहलोत एवं अडानी का  पुतला फूंक,  प्रदर्शन किया |

सरगुजा के  विकासखंड उदयपुर अंतर्गत आने वाले ग्राम हरिहरपुर में गुरुवार को साल्ही, हरिहरपुर, घाटबर्रा, फतेहपुर के सैकड़ों महिला एवं पुरुषों ने परसा कोल खदान के विरोध में राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार का तथा कोल खदान का संचालन करने वाली कंपनी अडानी का पुतला फूंका ।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि परसा कोल ब्लॉक प्रारंभ करने के लिये राजस्थान सरकार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा जबरन छत्तीसगढ़ सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है।

गुरुवार को घाटबर्रा, हरिहरपुर, फतेहपुर तथा आसपास के सैकड़ों ग्रामीण फतेहपुर में खदान के विरोध में दोपहर 12 बजे से इक्कठा होने लगे | इसी दौरान कुछ खदान समर्थक ग्रामीण हो हल्ला करने लगे|

तब खदान के विरोध में इक्कट्ठे ग्रामीणों ने स्थान परिवर्तन करते हुए रैली के रूप में लगभग 4 किलोमीटर पैदल चलकर दोपहर 3 बजे ग्राम हरिहरपुर पहुंचे | वहाँ सभा का आयोजन किया एवं राजस्थान सरकार अशोक गहलोत और अदानी कम्पनी का पुतला फूंका।

सुनीता पोर्ते

चर्चा के दौरान सुनीता पोर्ते ने बताया कि गांव बर्बाद होवत है । हमर एतना सुंदर गांव ला उजाड़त है हमन उजाड़े नई देन चाहते है। हम अच्छा से है अच्छा रहना चाहते है इसलिये पुतला दहन किये है। हम अपने गांव से बेघर नहीं होंगे और ना ही कहीं जाएंगे। हम अपने जमीन जगह के लिए जान दे सकते हैं पर जमीन नहीं दे सकते।

रामलाल करियाम ने कहा हसदेव अरण्य क्षेत्र में ग्रामवासी एक दशक से जंगलों को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं । परसा कोल ब्लॉक के लिए जो ग्राम सभा प्रस्ताव हुआ था वह फर्जी है। गहलोत सरकार दबाव बनाकर खदान प्रारंभ कराना चाहती है इसके विरोध में हम लोग पुतला दहन किए हैं| साथ ही रामलाल ने यह भी कहा कि पदयात्रा के बाद परसा कोल खदान के कार्य को रोका गया है इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद है भूपेश सरकार को।

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नानदेई

ग्राम घाटबर्रा की महिला नानदेई ने आरोप लगाया कि खदान की वजह से हमारे जंगल का विनाश हो रहा है जंगल पर आधारित संसाधन नष्ट हो रहे हैं जिससे आजीविका पर असर पड़ रहा है साथ ही भारी ब्लास्टिंग से घरों में दरार पड़ चुके हैं हम किसी भी कीमत पर जमीन नहीं देंगे।

हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के उमेश्वर सिंह अर्मो ने कहा परसा कोल ब्लाक की जमीन अधिग्रहण कोल बेयरिंग एक्ट 1957 से हो रहा हैं वह भी बिना ग्रामसभा सहमती लिए जबकि यह क्षेत्र संविधान की पांचवी अनुसूची में शामिल है l प्रस्तावित खनन क्षेत्र की सीमा में 841 हेक्टेयर वन भूमि के व्यपवर्तन की स्वीकृति भी केन्द्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु मंत्रालय के द्वारा 21 अक्टूबर को जारी की गई थी जबकि प्रभावित गाँव की ग्रामसभाओ ने खनन का सतत विरोध किया है l
प्रस्तावित परसा कोयला खनन परियोजना मध्य भारत के सबसे समृद्ध वन क्षेत्र हसदेव अरण्य में स्थित है और इस सम्पूर्ण वन क्षेत्र को ही वर्ष 2010 में केन्द्रीय वन पर्यावरण, एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के द्वारा खनन हेतु नो गो घोषित किया गया था l नो गो घोषित होने का तात्पर्य ही यही था कि यह एक समृद्ध वन है जो जैव विविधता से परिपूर्ण, वन्य प्राणियों का रहवास, हसदेव नदी का जलागम क्षेत्र और पर्यावरण रूप से बहुत ही संवेदनशील क्षेत्र हैं l
पिछले दिनों ही हसदेव अरण्य वन क्षेत्र की जैव विविधता अध्ययन में भारतीत वन्य जीव संस्थान ने कहा है की हसदेव अरण्य समृद्ध वन क्षेत्र है हाथी सहित महत्वपूर्ण वन्य पप्राणियों का रहवास है और यदि यहाँ खनन हुआ तो प्रदेश में मानव हाथी द्वन्द का
संकट बहुत विकराल हो जायेगा l

इधर पुतला दहन प्रदर्शन की सूचना पर फतेहपुर हरिहरपुर ग्राम में  पुलिस बल तैनात रहे हैं | इस दौरान उदयपुर तहसीलदार सुभाष शुक्ला एवं एसडीओपी अंबिकापुर थाना प्रभारी उदयपुर धीरेंद्र नाथ दुबे के नेतृत्व में सुरक्षा की दृष्टि से सुबह से ही  मौजूद  रहे।

deshdigital के लिए क्रांतिकुमार रावत की रिपोर्ट

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