देवपुर वन परिक्षेत्र में हाथियों का डेरा, वन विभाग अपनी चाल में मस्त

देवपुर वन परिक्षेत्र में शिकारी करंट से हाथी की मौत के बाद दर्जन भर से अधिक हाथी इस परिक्षेत्र में डेरा डाल चुके हैं. इधर इस मामले में वन विभाग की लापरवाही सामने आने के बाद भी वन अफसर की कार्यशैली से कई सवाल उठने लगे हैं.

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पिथौरा| देवपुर वन परिक्षेत्र में शिकारी करंट से हाथी की मौत के बाद दर्जन भर से अधिक हाथी इस परिक्षेत्र में डेरा डाल चुके हैं. इधर इस मामले में वन विभाग की लापरवाही सामने आने के बाद भी वन अफसर की कार्यशैली से कई सवाल उठने लगे हैं. हाथी के शव को मीडिया की नजरों से बचाने की कोशिश को लेकर पहले ही कई चर्चाएँ चल रही हैं.

मिली जानकारी के अनुसार हाथी की शिकारी करंट से मौत के बाद कोई दर्जन भर से अधिक हाथी इस परिक्षेत्र में डेरा डाल चुके हैं. वर्तमान में धान खरीदी केंद्रों में पड़े धान के अलावा खेतों में पके खड़े धान से हाथी अपनी भूख मिटा रहे हैं. जिस वन विभाग पर वनवासियों की सुरक्षा का दायित्व है उसी वन विभाग के अफसरों ने वनवासियों को उनके हाल पर छोड़ दिया है, जिससे आगामी समय में किसी गम्भीर घटना की आशंकाएं बढ़ गई हैं.

 हाथी शव को गुपचुप दफनाने की तैयारी थी ?

ग्राम पकरीद के समीप करंट से मारे गए हाथी को मीडिया के पहुंचने से पहले ही दफन करने की तैयारी थी ? इस बात का आभास तब हुआ जब मीडिया कर्मी घटना स्थल पहुंचे तब कोई अफसर तो वहां नहीं पहुंचे थे परन्तु हाथी के पास गड्ढा खोदने के लिए जेसीबी खड़ी थी.

हाथी की करंट से मौत के बाद सात गांवों में रात 8 बजे से बिजली लापता

इसके बाद मीडिया में खबरें प्रकाशित होते ही उच्च पदस्थ अफसर भी घटनास्थल पहुंचने लगे और नियमानुसार मृत हाथी का पंचनामा पोस्टमॉर्टम एवम कफ़न दफन कराया गया. हाथी को दफनाते ही वन अफसर इसके आरोपी तक भी पहुंच  गए और आरोपियों को पकड़ने के बाद खोजी कुत्ते को बुलाकर आरोपी की जांच की औपचारिकता पूरी की गई. इस पूरे घटनाक्रम से इस क्षेत्र में पदस्थ अफसरों की कार्यशैली का संदिग्ध होना लाजिमी है. इसके बाद भी आरोपी माने गए प्रभारी रेंजर से प्रभार ही वापस लिया गया.

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वन विभाग कर रहा मानवाधिकार हनन

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क्षेत्र में एक हाथी की विभागीय अफसरों की लापरवाही से हुई मौत ने वनवासियों के सामने एक नई मुसीबत खड़ी कर दी है. वन विभाग स्वयम हाथी उन्मूलन के लिए कोई प्रयास करने की बजाय क्षेत्रवासियों को हाथियों के बीच उनके हाल पर छोड़ रहा है. ऐसे ही एक प्रयास में वन विभाग के एक  आदेश से विद्युत विभाग द्वारा वन क्षेत्रों के गांवों में शाम 7 से सुबह 7 तक विद्युत अवरोध किया जा रहा है जिससे ग्रामीणों का मूलभूत अधिकार तो छीना ही जा रहा है साथ में उन्हें हाथी के पैरों की ओर धकेला भी जा रहा है.

हाथी की करंट से मौत के बाद सात गांवों में रात 8 बजे से बिजली लापता

देवपुर के समीप एक खेत में काम कर रहे एक ग्रामीण ने बताया कि शाम 7 बजे से विद्युत बन्द करने से अब वे खेतों की पराली जला कर अपनी सुरक्षा कर रहे हैं क्योंकि इस क्षेत्र में दर्जनों हाथी हैं, जो कि दिन भर जंगल में रहते हैं और शाम होते ही खेतों का धान खाने पहुंच जाते हैं जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

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file photo

शिकारियों को खुली छूट!

देवपुर वन परिक्षेत्र में विगत दो वर्षों से शिकार के मामलों में बेतहासा वृद्धि हुई है जबकि इन दो वर्षों में विभागीय कार्यवाही मात्र खानापूर्ति तक सिमट गई है. यदि दो वर्ष पूर्व का रिकॉर्ड देखे तो प्रतिमाह एक से दो प्रकरण शिकारियों के पकड़े ही जाते थे. जिसमें आरोपियों को जेल दाखिल भी किया जाता रहा है. परन्तु विगत दो वर्षों से देवपुर के जंगलों को पूरी तरह शिकारियों एवम सागौन तस्करों के हाथ में सौंपा गया. पहली नजर में इसका सबूत देवपुर क्षेत्र में अवैध कटाई से बचे ठूंठ एवम यहां के जांच नाकों में वाहनों की औपचारिक जांच भी बन्द होना है.

वन जांच नाका सप्ताह भर से टूटा पड़ा  

देवपुर वन परिक्षेत्र में लगातार शिकार की घटनाओं से सबक लेने की बजाय विभाग अभी भी लापरवाह बना हुआ है. पिथौरा से देवपुर मार्ग पर स्थित क़ुरकुटी जांच चौकी का नाका हाथी की मौत के बाद से टूटा पड़ा है. परन्तु इसे बनवाने की चिंता वन अफसरों को नहीं है लिहाजा पूरे हालात देख कर ऐसा लगता है कि वन अफसरों ने पूरा देवपुर परिक्षेत्र वन अपराधियों के लिए खुला छोड़ दिया गया है.

deshdigital के लिए रजिंदर खनूजा 

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