खैनी खाये चूतिया, थूके सारी ओर

अब खैनी की जगह गुटखा का शब्द का इस्तेमाल सामयिक होगा

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उत्तर भारत में प्रचलित इस कहावत में अब खैनी की जगह गुटखा का शब्द का इस्तेमाल सामयिक होगा| गुटखा जिसमें खैनी (जर्दा) भी शामिल होता है| देश भर में आपको गुटखा प्रेमी मिल जाएंगे|यानि गुटखा ने इस श्रेणी के लोगों का विस्तार कर दिया है| देश में अब चूतिया,चूतियों की कमी नहीं रही| हर चौराहे थूकते नजर आयेंगे|

डॉ निर्मल कुमार साहू 

गांजा पिये राजा, भांग खाए चोर

खैनी खाये चूतिया, थूके सारी ओर

उत्तर भारत में प्रचलित इस कहावत में अब खैनी की जगह गुटखा का शब्द का इस्तेमाल सामयिक होगा|

गुटखा जिसमें खैनी (जर्दा) भी शामिल होता है| देश भर में आपको गुटखा प्रेमी मिल जाएंगे|

यानि गुटखा ने इस श्रेणी के लोगों का विस्तार कर दिया है| देश में अब चूतिया,चूतियों की कमी नहीं रही| हर चौराहे थूकते नजर आयेंगे|

पर पान खाते थूकने वाले? ये भी इसी श्रेणी के हैं क्योकि इस पान में खैनी विराजमान होता है जो दांतों के बीच पिसता रहता है| जब जीभ की सम्हालने की औकात ख़त्म हो जाती है, गालों पर दबाव पड़ने लगता है तब फूट पड़ता है कहीं भी|

सरकारी-निजी दफ्तरों की सीढियों के किनारों को देखकर चूतियों की आमद की मात्रा का पता लगाया जा सकता है|

संसद की गलियारों में गुजरने का सौभाग्य नहीं मिला कभी, दूर से चकाचक दिखता है|

इन दिनों देश में चुनाव का मौसम है। नेता एक-दूसरे पर बुरी तरह थूक रहे हैं, किसी -किसी को उल्टी करने से भी परहेज नहीं है।

अक्सर विकास के संदर्भ में गुजरात मॉडल का जिक्र किया जाता है और गुजरातियों के उद्यम की प्रशंसा होती है। लेकिन गुजरातियों की हरकतों से  इंग्लैंड परेशान है। कभी भारतीयों पर राज करने वाले इन गोरों की नाक में दम कर रखा है यहां रहे रहे गुजरातियों ने।

साभार https://www.timesnownews.com/…/gujaratis-in-this…/400143

दरअसल भारत में तो पान या गुटखा खाकर सडक़ों पर थूकने वालों की कमी नहीं है, लेकिन इंग्लैंड के लीसेस्टर शहर की सड़कें पान की पीकों से लाल हो रहे हैं। भारत से आकर जमे गुजरात के इन लालों की आदत से पुलिस इतनी परेशान हो गई है कि उसे सड़क पर एक बोर्ड लगाना पड़ा है।

गुजराती और अंगरेजी में इस बोर्ड पर लिखा गया है, सड़क पर पान थूकना अस्वास्थ्यकर और असामाजिक है। आप पर 150 यूरो (13,000 रुपये) का जुर्माना लगाया जा सकता है।

सड़कों पर पान थूकने की घटनाएं उन इलाकों में ज्यादा हो रही हैं, जहां भारतीयों की संख्या ज्यादा है। इनमें गुजराती भाइयों की तादादा ज्यादा होगी तभी तो अंगरेजों को गुजराती में भी लिखना पड़ा है।

एक बिहारी सौ बीमारी कहकर खिल्ली उड़ाने वाले गुजराती अब सतर्क हो जाएं। कुछ दिनों में इनके लिए भी इसी तरह का कोई स्लोगन तैयार हो न जाए|

दुनिया में इन दिनों हाहाकार मचने वाली कोरोना नामक महामारी थूक पर जी रही है|

खैर…, गांजा पीकर मस्त रहने वाले राजा, भांग खाने वाले चोर, और पान खाने वाले सैयों का किया जाये?

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