एक खुली चिठ्ठी: भूपेश जी, छत्तीसगढ़ में आपकी करुणा और संवेदना कहाँ चली जाती है ?

आप लखीमपुर घटना में प्रभावितों को प्रति परिवार 50 - 50 लाख रुपये दे रहे हैं । आपकी करुणा और संवेदना का मैं सम्मान करता हूँ । आपकी यही करुणा और संवेदना छत्तीसगढ़ के योग्य जरूरतमंदों के लिए कहाँ चली जाती है ?

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यूपी में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा लखीमपुर में मारे गए किसानों के परिजनों को 50-50 लाख रूपये की घोषणा ने छत्तीसगढ़ में चर्चाओं – टिप्पणियों का दौर शुरू हो गया है | सोशल मिडिया खासकर सक्रिय हो गया है |  सियासी टिप्पणियाँ तो स्वाभाविक हैं |  बुद्धिजीवी वर्ग भी सवाल खड़े करने लगा है ? कि आखिर क्या हो जाता है छत्तीसगढ़ में उनकी संवेदनशीलता को ? बस्तर का सिलगेर हो या सरगुजा का जारी आदिवासी आन्दोलन,  किसानों–आदिवासियों का हमदर्द का दावा करने वाले भूपेश बघेल अब कहाँ खड़े हैं |

deshdigital को सोशल मिडिया के जरिये मिली मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम सवालों से भरी एक खुली चिठ्ठी मिली|

 

 

माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ , भूपेश बघेल जी आपसे एक सवाल   

आज सोशल मीडिया में जो खबरें छनकर आ रही हैं , उसके अनुसार आप लखीमपुर घटना में प्रभावितों को प्रति परिवार 50 – 50 लाख रुपये दे रहे हैं । आपकी करुणा और संवेदना का मैं सम्मान करता हूँ ।

आपकी यही करुणा और संवेदना छत्तीसगढ़ के योग्य जरूरतमंदों के लिए कहाँ चली जाती है ? छत्तीसगढ़ के हजारों उच्च शिक्षित युवा उच्च शिक्षा विभाग में अतिथि व्याख्यान व्यवस्था से ₹ 200 प्रति पीरियेड ; एक दिन में अधिकतम ₹ 800 और एक माह में अधिकतम ₹ 20800 की सीलिंग पर अध्यापन कर रहे हैं ।

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यह मानदेय विगत दस शिक्षण सत्र पूर्व निर्धारित है । सभी के लिए मँहगाई लगातार बढ़ रही है । न्यूनतम मजदूरी और किसानों के लिए धान समर्थन मूल्य में भी वृद्धि हो चुकी है । क्या अतिथि व्याख्याताओं के लिए मँहगाई दस वर्षों पूर्व की स्थिति में ही जस का तस है ? यूजीसी के निर्देशानुसार मानदेय , अन्य संवैधानिक और मानवीय सुविधाएँ तथा स्थायित्व कब प्रदान करेंगे ? उच्च शिक्षा विभाग की रीढ़ को मजबूत करने की दिशा में आप और आपके अधिकारी कब सोचेंगे ?

ये अतिथि व्याख्याता एक सत्र में मुश्किल से छह माह मानदेय प्राप्त करते हैं और छह माह बेरोजगारी का दंश झेलने अभिशप्त हैं । छत्तीसगढ़ के यशस्वी और प्रबुद्ध मुख्यमंत्री जी ! यदि आप में या आपके सलाहकार में सचमुच में करुणा और संवेदना है , तो अतिथि व्याख्याताओं के लिए भी कोई ठोस नीति निर्धारित कर अपनी उदारता का परिचय देते तो अच्छा रहता ।

हो सकता है , आसन्न चुनाव की लाभ हानि की दृष्टि आपकी घोषणा का प्रेरक कारक हो । सच्चाई यह है , अतिथि व्याख्याता न बहुत बड़ा वोटबैंक हैं और ही न उनका कोई मजबूत संगठन ही है । आखिर वे और उनका परिवार सरकार को किसी प्रकार का कोई सहयोग भी नहीं कर पाते । चुनाव के समय मात्र एक वोट ही तो देते हैं ।

आदरणीय बघेल जी ! छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा रसातल में है । प्रशासन और संचालनालय में पदस्थ तमाम जिम्मेदार सच जानकार भी आँखें मूँदे हैं । कमियों कमजोरियों को दूर करना ही नहीं चाहते । छत्तीसगढ़ में परिणाममूलक एवं दूरदर्शी फलदायक नीतियाँ बनें ; जिससे यहाँ का सर्वतोन्मुखी समुन्नत विकास हो ; प्रदेश के जिम्मेदार सूत्रधारों की यह प्राथमिकता ही नहीं है । इसलिए आपसे निवेदन है , लखीमपुर वाली करुणा और संवेदना का परिचय यहाँ भी दें ।

मैं मात्र उच्च शिक्षा विभाग के अतिथि व्याख्याताओं की दशा दुर्दशा पर आपका ध्यानाकृष्ट किया हूँ । सभी क्षेत्रों में सुशासन और सर्वोत्कृष्ट कार्य निष्पादन अपेक्षित है । आपकी राजनीति और बेदाग छवि का मैं प्रशंसक हूँ ; किन्तु जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम दिखना चाहिए । उम्मीद है , आप सहृदयता दिखायेंगे ।

– डॉ. सुबोध देवांगन

 

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