धरमजयगढ़ वन क्षेत्र में फिर एक हाथी की मौत

बिलासपुर संभाग के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन क्षेत्र के बनहर गाँव में एक हाथी मृत पाया गया।  पिछले साल प्रदेश में सर्वाधिक  हाथियों की मौत हुई है|यह हाथी उसी इलाके में मारा गया है जहाँ राज्य सरकार ने एलिफेंट रिजर्व बनाए की घोषणा की थी बाद में इस इलाके को कोल माइनिंग के लिए दे दिया गया है|

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रायगढ़| बिलासपुर संभाग के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन क्षेत्र के बनहर गाँव में एक हाथी मृत पाया गया।  धरमजयगढ़ एसडीओ के मुताबिक  पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट में ही मौत का कारण पता चलेगा। बता दें कि हाल ही में सूरजपुर में हाथी का शव मिला था। वही पिछले साल प्रदेश में सर्वाधिक  हाथियों की मौत हुई है|

यह हाथी उसी इलाके में मारा गया है जहाँ राज्य सरकार ने एलिफेंट रिजर्व बनाए की घोषणा की थी बाद में इस इलाके को कोल माइनिंग के लिए दे दिया गया है|

आंकड़ो के अनुसार अब तक इस परिक्षेत्र में यह 23वें हाथी की मौत है। वहीं 2006 से लेकर अब तक हाथियों ने 53 महिला पुरुषों को मौत के घाट उतार दिया है ।

बताया जा रहा है कि ग्राम बनहर के कृषक मेहत्तर राम कमलवंशी ने अपने खेतों के पास टिकरा में मूंगफली की खेती की थी, वहां हाथियों का झुंड पहुंचा था।. हाथी उसी टिकरा खेत में मृत मिला है।

ग्रामीणों ने वन विभाग को घटना की सूचना दे दी है। नजदीक ही विद्युत ट्रांसफार्मर होने के कारण अंदेशा जताया जा रहा है कि हाथी की मौत करंट की वजह से हुई है।हालांकि मौत के कारणों का साफ तौर पर पता नही चला है।मौत की सही जानकारी  पोस्टमार्टम के बाद ही मिल पाएगी।

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बता दें प्रदेश के कई इलाकों में जंगली वन्य जीवों के शिकार के लिए शिकारी करंट का हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं | इसकी चपेट में आकर कई बार हाथी भी जान गंवाते रहे हैं| इस तरह की कई घटनाएँ इसके पहले  आ चुकी हैं|

वहीँ  हाथी वन इलाकों में बढ़ते इंसानी दखल का खामियाजा इंसान को  भुगतना पड़ रहा है| वे भी हाथियों के पैर तले मारे  जा रहे हैं|

छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों में जंगली हाथियों की शिकार के लिए शिकारियों द्वारा लगाए जाने वाले फंदे में फंस कर हो रही मौतो से लगता है कि हाथी संरक्षण हेतु प्रदेश में हाथियों के कॉरिडोर बनाने में वन विभाग अब तक असफल ही रहा है।वह विभाग हाथियों के हमले से मरने वालों के परिजनों को मुआवजा देते को ही अपनी ड्यूटी समझने लगा है।जबकि हाथियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी वन विभाग की ही होती है।

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