छत्तीसगढ़: सर्व आदिवासी समाज की आर्थिक नाकेबन्दी शुरू

छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज ने आज  30 अगस्त को 9 सूत्रीय मांगों पर आर्थिक नाकेबन्दी शुरू कर दी | जिसमें  बस्तर में आदिवासियों का दमन, फर्जी मुठभेड़, भू हस्तातंरण का विरोध, पांचवी अनुसूची, पेसा और वनाधिकार मान्यता कानून के क्रियान्वयन जैसी प्रमुख मांगे शामिल हैं।

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रायपुर | छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज ने आज  30 अगस्त को 9 सूत्रीय मांगों पर आर्थिक नाकेबन्दी शुरू कर दी | जिसमें  बस्तर में आदिवासियों का दमन, फर्जी मुठभेड़, भू हस्तातंरण का विरोध, पांचवी अनुसूची, पेसा और वनाधिकार मान्यता कानून के क्रियान्वयन जैसी प्रमुख मांगे शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ के कई  जिलों में सुबह 11 बजे से प्रदर्शनकारी सड़कों और पटरियों पर जमे हुए हैं |

प्रदर्शनकारियों ने  मुख्य राजमार्गों –मार्गों पर चक्काजाम किया है। बालोद जिले के मानपुर में आदिवासी समाज के पटरी पर उतर आने की खबर है |
राजधानी रायपुर के करीब आरंग, बलौदा बाजार, बालोद, बिलासपुर, रायगढ़, गरियाबंद, धमतरी, राजनांदगांव, दल्ली राजहरा, कांकेर, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, सरगुजा जैसे जिलों में भी प्रदर्शन की तस्वीर और खबरें सोशल मिडिया पर भी वायरल हो रही हैं |

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बिलासपुर के  कोटा नाका चौक पर आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने आर्थिक नाकेबंदी करते हुए सभी मालवाहक गाड़ियों को रोककर प्रदर्शन किया। इस दौरान सड़क पर दोनों ओर भारी वाहनों की लंबी कतारें लग गई, हालांकि इस दौरान अन्य वाहनों को नही रोका गया।

सरगुजा के सूरजपुर जिले में मनेन्द्रगढ़ रोड़ कलुआ चौक पर सर्व आदिवासी समाज सुरजपुर सड़क पर ही डेरा डाल लेट गये |  समाज के एक नेता विजय सिंह मरपच्ची ने सोशल मिडिया फेसबुक पर तस्वीर पोस्ट कर यह प्रदर्शन सुबह 9 बजे से शुरू होकर शाम 5 बजे तक चलने की जानकारी दी है | साथ ही वे लिखते हैं -पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में ऐतिहासिक नाकेबंदी 146 ब्लॉकों में |

उधर सर्व आदिवासी समाज के एक गुट के प्रतिनिधियों ने आर्थिक नाकेबंदी का विरोध किया है| उनका कहना है कि आंदोलन का यह तरीका गलत है, उन्हें पता है सर्व आदिवासी समाज के बड़े नेता असल में इन सबके आड़ में अपनी राजनीति चमका रहे हैं|  आर्थिक नाकेबंदी की बजाय, पूरा छत्तीसगढ़ बंद कराकर अपनी बात रखना ज्यादा उचित होता !!

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